लोकतंत्र में प्रदर्शन स्वाभाविक लेकिन उनका मकसद समाधान खोजना होना चाहिए- RSS
"लोकतंत्र में प्रदर्शन अपरिहार्य हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान ढूंढना होना चाहिए." - नागपुर में RSS के विजयदशमी उत्सव के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवा पीढ़ी, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर बेबाकी से बात रखी.
नागपुर । डेस्क: नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वार्षिक विजयदशमी उत्सव को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश के सामाजिक और राजनीतिक हालात पर कई महत्वपूर्ण विचार साझा किए. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका असली उद्देश्य किसी राजनीतिक एजेंडे को साधने के बजाय समस्याओं का समाधान निकालना होना चाहिए.
भागवत ने जोर देकर कहा कि जब प्रदर्शन जनकल्याण के इतर उद्देश्यों से प्रेरित होते हैं, तो वे समाज में विद्वेष फैलाने वाले राजनीतिक साधन बन जाते हैं. उन्होंने नेताओं, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन से अपील की कि वे संविधान के दायरे में रहकर और नागरिक संवाद की मर्यादाओं का पालन करते हुए काम करें, ताकि समाज में कटुता या विभाजन की स्थिति न पैदा हो.
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर बात करते हुए उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तनों का हवाला दिया. उन्होंने सचेत किया कि कुछ वैश्विक ताकतें अपने हितों के लिए 'सत्ता परिवर्तन' का रास्ता चुनती हैं. उन्होंने कहा कि एक मजबूत भारत ऐसी वैश्विक ताकतों के प्रभाव को सीमित करता है, इसलिए देश को कमजोर और विभाजित करने के प्रयास जारी हैं.
इसके अलावा, संघ प्रमुख ने सोशल मीडिया और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री को लेकर चिंता जताई और सरकार से समाज हित में आवश्यक नियम लागू करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल सूचनाओं के मुक्त प्रवाह पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनमें सही और गलत की पहचान करने के लिए विवेक और संयम का होना अत्यंत आवश्यक है.
इस भव्य समारोह में मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के कांसुल जनरल यानिव रेवाच भी शामिल हुए. उन्होंने संघ प्रमुख के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि भारत और इजरायल न केवल समान मूल्य साझा करते हैं, बल्कि दोनों देशों के सामने समान चुनौतियां भी हैं. उन्होंने युवाओं को उनकी जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के भागवत के संदेश का समर्थन किया.