UPI में भारत सबसे आगे-IMF
नई दिल्ली । डेस्क: भारत ने यूपीआई की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ तेज डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर लिया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नवीनतम फिनटेक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
आईएमएफ की रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है “ग्रोइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स: द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी”, भारत के डिजिटल परिवर्तन को रेखांकित करती है. इसमें बताया गया है कि यूपीआई विश्व में सबसे बड़ा रिटेल फास्ट पेमेंट सिस्टम बन गया है, जो लेनदेन की मात्रा के मामले में शीर्ष पर है.
रिपोर्ट के अनुसार, “भारत अब किसी भी अन्य देश की तुलना में तेजी से डिजिटल भुगतान कर रहा है.” यूपीआई की सफलता का आधार इसकी इंटरऑपरेबिलिटी है, जो विभिन्न भुगतान प्रदाताओं और बैंकों के बीच निर्बाध लेनदेन को संभव बनाती है.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड जैसे अन्य भुगतान साधनों का उपयोग कम हुआ है, क्योंकि उपभोक्ता और व्यवसाय सुविधा और गति के लिये यूपीआई को प्राथमिकता दे रहे हैं.
डिजिटल भुगतान की कुल मात्रा नकदी के उपयोग की तुलना में काफी बढ़ गई है, जो भारत के नकदीरहित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है.
आईएमएफ ने कहा, “यूपीआई इंटरऑपरेबल सिस्टम का एक मजबूत उदाहरण है, जो डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है.” रिपोर्ट अन्य देशों को भी ऐसी ओपन-लूप संरचना अपनाने के लिये प्रोत्साहित करती है ताकि उनकी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं को गति मिले.
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा विकसित यूपीआई, मोबाइल फोन के जरिए रीयल-टाइम अंतर-बैंक लेनदेन को सुगम बनाता है.
2016 में लॉन्च होने के बाद से, यूपीआई ने अभूतपूर्व वृद्धि देखी है और वर्तमान में हर महीने 18 अरब से अधिक लेनदेन प्रोसेस करता है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में यूपीआई लेनदेन की मात्रा 18.40 अरब रही.
पीडब्ल्यूसी इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई के लेनदेन वित्त वर्ष 2027 तक प्रतिदिन 1 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है. अगले पांच वर्षों में यूपीआई कुल रिटेल डिजिटल भुगतान की 90 प्रतिशत होगा.
भारत की यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर ध्यान आकर्षित कर रही है. कई देश यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म या सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जिससे भारत की वैश्विक फिनटेक नेतृत्व की स्थिति और मजबूत हो रही है.