6 माह तक के बच्चों के खाने में मिठास मिलाने पर रोक लगेगी
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 6 महीने तक के नवजात शिशुओं के लिए बनने वाले खाद्य उत्पादों और डिब्बाबंद दूध में अलग से सुक्रोज (सामान्य चीनी) और फ्रक्टोज मिलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है.
नई दिल्ली । डेस्क: छोटे बच्चों की सेहत और बेहतर पोषण को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 6 महीने तक के नवजात शिशुओं के लिए बनने वाले खाद्य उत्पादों और डिब्बाबंद दूध में अलग से सुक्रोज (सामान्य चीनी) और फ्रक्टोज मिलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है.
FSSAI द्वारा खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण) नियमों में इस संशोधन का मसौदा जारी कर दिया गया है. सरकार के इस कदम का मुख्य मकसद नवजात बच्चों को शुरुआती उम्र में ही अतिरिक्त चीनी के हानिकारक प्रभावों से बचाना है. विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती 6 महीनों में ज्यादा मिठास देने से बच्चों में आगे चलकर मोटापे, दांत खराब होने और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.
मौजूदा नियमों के तहत बच्चों के खाने में लैक्टोज और ग्लूकोज को प्राथमिक कार्बोहाइड्रेट माना जाता है, जबकि सुक्रोज या फ्रक्टोज सीमित मात्रा में मिलाने की छूट थी. लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, अब 6 महीने से छोटे बच्चों के किसी भी उत्पाद में इन्हें बिल्कुल भी नहीं मिलाया जा सकेगा.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकार का मानना है कि जीवन के पहले 6 महीने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद नाजुक होते हैं. इस दौरान केवल मां का दूध ही सबसे उत्तम और जरूरी आहार माना जाता है. यदि किसी वजह से शिशु आहार का इस्तेमाल किया भी जाए, तो वह पूरी तरह से सुरक्षित और बिना किसी फालतू मिठास के होना चाहिए.
FSSAI ने इस नए नियम के मसौदे को आम जनता और संबंधित कंपनियों के सुझावों व आपत्तियों के लिए जारी किया है. अगले 60 दिनों के भीतर मिलने वाले सुझावों पर विचार करने के बाद इस नियम को अंतिम रूप से लागू कर दिया जाएगा.