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भिलाई: 30 हजार कर्मचारियों का सत्यापन शुरू, अवैध बांग्लादेशी रडार पर

दुर्ग जिले में अवैध रूप से निवास कर रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए पुलिस और प्रशासन ने अपनी कार्रवाई काफी तेज कर दी है. इसके तहत भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) सहित क्षेत्र के विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले करीब 30 हजार ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है.

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17 अक्टू. 2026, 06:50 PM 3 मिनट में पढ़ें 22

छत्तीसगढ़ पुलिस
छत्तीसगढ़ पुलिस

दुर्ग । संवाददाता: दुर्ग जिले में अवैध रूप से निवास कर रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए पुलिस और प्रशासन ने अपनी कार्रवाई काफी तेज कर दी है. इसके तहत भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) सहित क्षेत्र के विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले करीब 30 हजार ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है. 

संदिग्धों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की एक टीम को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता रवाना किया गया है. जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर अपराध दर्ज नहीं हैं, उन्हें वापस उनके देश डिपोर्ट करने के लिए एक विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई है. राज्य सरकार के माध्यम से ऐसे मामलों में केस वापस लेने का प्रस्ताव भेजा जाएगा.

पुलिस जांच के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिक आमतौर पर बिचौलियों की मदद से सीमा पार कर सबसे पहले कोलकाता पहुंचते हैं. वहां से फर्जी कागजात बनवाकर वे देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में फैल जाते हैं और धीरे-धीरे स्थानीय पहचान पत्र तैयार करवा लेते हैं. भिलाई में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग बरसों से अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहे थे. 

हाल ही में भिलाई पुलिस ने बांग्लादेश की रहने वाली पन्ना बीवी को गिरफ्तार किया है, जो 14 साल की उम्र में भारत आई थी. दिल्ली में 'अंजलि सिंह' के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाने के बाद वह दो साल पहले भिलाई आ गई. उसने इसी फर्जी पहचान पर अस्पताल में इलाज भी कराया. पुलिस ने पन्ना बीवी और उसे शरण देने वाले मकान मालिक सूरज साव को जेल भेज दिया है.

इसके अलावा सुपेला थाना क्षेत्र से ज्योति रसेल उर्फ शाहिदा खातून और उसके पति मोहम्मद रसेल को पकड़ा गया, जो पहले भी गिरफ्तार हो चुके थे और जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा पहचान बदलकर रह रहे थे. जांच में सामने आया कि ये दंपती इंटरनेट और व्हाट्सएप के जरिए बांग्लादेश में अपने रिश्तेदारों से संपर्क में थे. वहीं मोहन नगर पुलिस ने भी एक ठिकाने पर छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की आड़ में रह रही दो बांग्लादेशी युवतियों को पकड़ा.

इससे पहले बीएसपी में कार्यरत 1,188 श्रमिकों के दस्तावेजों की सघन जांच के दौरान सात बांग्लादेशियों को पकड़ा गया था. इसके अतिरिक्त बिना जानकारी दर्ज कराए रह रहे 777 लोगों को चिह्नित किया गया, जिनमें से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश के 160 संदिग्धों के स्थायी पते पर सत्यापन के लिए सस्पेक्ट रोल भेजे गए हैं. संपूर्ण ब्योरा तैयार होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP