रायपुर: तीन साल का सौतेले पिता और मां ने तोड़ा हाथ, सिगरेट से दागा
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के थाना सिविल लाइंस इलाके में एक तीन साल के मासूम बच्चे के साथ उसकी सगी मां और सौतेले पिता द्वारा बर्बरता और जानलेवा शारीरिक प्रताड़ना की गई है.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के थाना सिविल लाइंस इलाके में एक तीन साल के मासूम बच्चे के साथ उसकी सगी मां और सौतेले पिता द्वारा बर्बरता और जानलेवा शारीरिक प्रताड़ना की गई है. आरोपी दंपति मासूम को मामूली बातों पर बेरहमी से पीटते थे और उसके शरीर को जलती हुई सिगरेट से जगह-जगह से दागते थे.
इस हैवानियत की इंतहा तब सामने आई जब लगातार मारपीट के कारण बच्चे का एक हाथ टूट गया तथा उसके चेहरे और आंखों के आसपास गंभीर चोटों के निशान पाए गए.
इस खौफनाक घटना का खुलासा तब हुआ जब आसपास रहने वाले पड़ोसियों ने घर से लगातार बच्चे के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनीं. जब पड़ोस की एक महिला ने हिम्मत जुटाकर माता-पिता से बच्चे को न पीटने की गुजारिश की, तो आरोपी दंपति ने उसके साथ भी बदसलूकी की और उसे डांटकर भगा दिया.
पड़ोसियों को जब अनहोनी का अंदेशा हुआ, तो उन्होंने बिना देर किए तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी.
शिकायत मिलते ही सिविल लाइंस थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और मासूम को आरोपी माता-पिता के चंगुल से मुक्त कराया.
पुलिस ने बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार जारी है. पूछताछ के दौरान तीन साल के मासूम ने पुलिस अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसकी मां और सौतेले पिता उसे रोज छोटी-छोटी बातों पर इसी तरह निर्दयता से पीटते थे.
सिविल लाइंस थाना प्रभारी (SHO) यमन देवांगन ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को आरोपी मां को हिरासत में लिया था, जबकि फरार चल रहे सौतेले पिता को शुक्रवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश करने की तैयारी में है, जहां से उन्हें जेल भेजा जाएगा.
मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ 'किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम' (Juvenile Justice Act) की धारा 75 के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बच्चों के साथ क्रूरता, उत्पीड़न और लापरवाही बरतने पर कठोर सजा का प्रावधान है. वहीं, संकटग्रस्त या प्रताड़ित बच्चों की मदद के लिए आम नागरिक राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर तत्काल सूचना दे सकते हैं.
Juvenile Justice Act क्या है?
किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, यानी Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण कानून है जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा, कल्याण और पुनर्वास के लिए बनाया गया है. इस अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में कोई भी बच्चा चाहे वह कानून का उल्लंघन करने वाला हो या फिर देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाला, उसे न्याय, सुरक्षा और उपयुक्त माहौल मिल सके.
यह कानून बच्चों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित करता है: पहली श्रेणी में वे बच्चे आते हैं जिन्हें देखरेख और संरक्षण की जरूरत होती है, जैसे कि अनाथ, परित्यक्त (छोड़े गए), प्रताड़ित, बेघर या बाल श्रम और शोषण के शिकार बच्चे. ऐसे बच्चों की सुरक्षा, उनके रहने, खाने, शिक्षा और पुनर्वास का जिम्मा कानून के तहत गठित बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee - CWC) को सौंपा जाता है.
दूसरी श्रेणी में वे किशोर आते हैं जिन पर किसी कानून के उल्लंघन या अपराध का आरोप होता है, जिन्हें 'कानून का उल्लंघन करने वाले किशोर' कहा जाता है. ऐसे मामलों की सुनवाई और निपटारा बाल न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board - JJB) द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चे को सजा देना नहीं, बल्कि उसका सुधार और सामाजिक पुनर्वास करना होता है.
इस अधिनियम में बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों जैसे कि शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थों से दागे जाने या नुकसान पहुंचाए जाने, बाल श्रम, जबरन भीख मंगवाने और अवैध गोद लेने के मामलों में बेहद कड़े और गैर-जमानती दंड का प्रावधान किया गया है. कानून यह भी स्पष्ट करता है कि बच्चों से जुड़े किसी भी मामले में उनकी पहचान, जैसे नाम, फोटो या पते को उजागर करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है ताकि उनके भविष्य पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.
भारत सरकार ने संकटग्रस्त बच्चों की तत्काल मदद और सूचना देने के लिए एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1098 भी चालू किया है, जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक प्रताड़ित या जरूरतमंद बच्चे की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकता है.