चीन: नैनो-आयरन थेरेपी से 84% एडवांस्ड मरीजों में थमा कैंसर का बढ़ना
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर है कि एडवांस्ड और मेटास्टैटिक कैंसर से जूझ रहे उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद सामने आई है, जिन पर परंपरागत इलाज असर करना बंद कर चुके थे.
नई दिल्ली । डेस्क: साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर है कि एडवांस्ड और मेटास्टैटिक कैंसर से जूझ रहे उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद सामने आई है, जिन पर परंपरागत इलाज असर करना बंद कर चुके थे. चीनी डॉक्टरों ने एक अनूठी और अप्रत्याशित तकनीक का उपयोग करते हुए लोहे (आयरन) के तत्व से तैयार की गई एक विशेष दवा के माध्यम से कैंसर ट्यूमर के विकास को रोकने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.
इस नए इलाज का विचार औद्योगिक अपशिष्ट या गंदे पानी के उपचार की प्रक्रिया से आया है. जिस तरह फैक्ट्रियों के गंदे पानी में लोहे और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के रासायनिक मेल से खतरनाक जहरीले अणुओं को नष्ट किया जाता है, ठीक उसी सिद्धांत का इस्तेमाल मानव शरीर के भीतर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए किया गया.
वैज्ञानिकों ने लोहे को एक खास नैनो-कार्बन इंजेक्शन के साथ मिलाकर एक नई दवा 'सीएनएसआई-एफई' (CNSI-Fe) तैयार की, जिसमें मुख्य रूप से फेरस आयरन का उपयोग किया गया है. चीन के तीन प्रमुख अस्पतालों में 19 एडवांस्ड कैंसर रोगियों पर किए गए इस फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं.
अध्ययन में शामिल 84.2 प्रतिशत (16 मरीजों) में कैंसर का बढ़ना पूरी तरह थम गया, जबकि दो मरीजों के ट्यूमर का आकार काफी घट गया.
प्रसिद्ध पीयर-रिव्यू जर्नल 'सिग्नल ट्रांसडक्शन एंड टारगेटेड थेरेपी' में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, यह थेरेपी सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों मोर्चों पर खरी उतरी है. इस अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक और वेस्ट चाइना अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के कार्यकारी उप निदेशक प्रोफेसर वांग योंगशेंग ने बताया कि लोहे पर आधारित यह दवा ट्यूमर वाली जगह पर फेरोप्टोसिस प्रक्रिया को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं को लक्षित तरीके से नष्ट करती है.
इस अध्ययन की खास बात यह है कि परीक्षण में शामिल सभी 16 मरीज कैंसर के चौथे चरण यानी एंड-स्टेज मेटास्टैटिक ट्यूमर से पीड़ित थे. ये सभी मरीज पहले से ही कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी कम से कम दो लाइनों का इलाज करा चुके थे, लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा था.
इन मरीजों के शरीर में अग्न्याशय, स्तन, फेफड़े, अंडाशय, सिर और गर्दन तथा सार्कोमा जैसे गंभीर ट्यूमर थे. चिकित्सकों ने 'सीएनएसआई-एफई' दवा की अलग-अलग खुराक को सीधे मरीजों के ट्यूमर वाली जगह (इंट्राट्यूमरल) पर इंजेक्ट किया. नतीजों से पता चला कि ट्यूमर पर इसका असर पूरे शरीर के अन्य अंगों में फैले कैंसर के मुकाबले काफी तेज और असरदार था.
जैविक रूप से यह दवा सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर हमला करती है. दरअसल, स्वस्थ कोशिकाओं के पास ग्लूटाथियोन जैसा एंटीऑक्सीडेंट सिस्टम होता है, जो खुद को बचा लेता है.
वहीं ट्यूमर कोशिकाओं के पास यह सुरक्षा चक्र नहीं होता, जिससे लोहे से पैदा होने वाले फ्री रेडिकल्स ट्यूमर की कोशिका झिल्ली को पूरी तरह जंग लगाकर नष्ट कर देते हैं. ट्रायल के दौरान मरीजों में किसी भी तरह की गंभीर हेमेटोलॉजिकल, लिवर या किडनी से जुड़ी विषाक्तता नहीं देखी गई, जो पारंपरिक कीमोथेरेपी में आम बात है.
दर्द और उच्च रक्तचाप जैसे कुछ सामान्य दुष्प्रभाव ही दर्ज किए गए. जानवरों पर किए गए पिछले अध्ययनों में भी इस दवा ने स्तन, पेट और अग्न्याशय के कैंसर पर शानदार रोक लगाई थी. अब इस थेरेपी की सफलता को देखते हुए चीन के 10 शीर्ष अस्पतालों में 52 मरीजों पर दूसरे चरण (फेज-2) का बड़ा ट्रायल शुरू कर दिया गया है.