UGC का नया पाठ्यक्रम: भारतीय ज्ञान और संस्कृति को बढ़ावा
नई दिल्ली । डेस्क: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने स्नातक स्तर के लिए एक नया लर्निंग आउटकम्स-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क (एलओसीएफ) का मसौदा तैयार किया है, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली और प्राचीन संस्कृति को पढ़ाने पर खास जोर दिया गया है. यह पाठ्यक्रम मानव विज्ञान, रसायन विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, भूगोल, गृह विज्ञान, गणित, शारीरिक शिक्षा और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों के लिए बनाया गया है. यूजीसी ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों से राय मांगी है, ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके.
नए पाठ्यक्रम में भारतीय परंपराओं और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है. गणित में मंडल ज्यामिति, यंत्र, रंगोली, कोलम और मंदिर वास्तुकला जैसे विषय शामिल होंगे. इसके अलावा, भारतीय गणितज्ञों के अंकगणित, ज्यामिति, बीजगणित और कैलकुलस में योगदान को भी पढ़ाया जाएगा. इसका मकसद छात्रों को भारतीय गणित के इतिहास और इसके वैश्विक प्रभाव को समझाना है.
वाणिज्य के छात्रों को कौटिल्य के अर्थशास्त्र के साथ-साथ 'शुभ-लाभ' की अवधारणा पढ़ाई जाएगी, जो नैतिक व्यापार और जिम्मेदार नेतृत्व को बढ़ावा देती है. पाठ्यक्रम में 'राम राज्य' के सिद्धांत को कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) और पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) जैसे आधुनिक ढांचों से जोड़ा जाएगा. यह छात्रों को लाभ और नैतिकता के बीच संतुलन सिखाएगा.
अर्थशास्त्र में धार्मिक विचारों के आधार पर धन और समृद्धि की अवधारणा, राजा की अर्थव्यवस्था में भूमिका, व्यापार और श्रम नैतिकता, गिल्ड कोड, सामूहिक उद्यम, पारिस्थितिक और कृषि मूल्य, दान और स्वदेशी विनिमय प्रणाली जैसे विषय शामिल होंगे.
रसायन विज्ञान में पारंपरिक भारतीय पेय जैसे कांजी, महुआ और ताड़ी के रासायनिक गुणों और उनके निर्माण में चीनी से इथेनॉल में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं को पढ़ाया जाएगा. साथ ही, प्राचीन भारत में परमाणु की अवधारणा को भी शामिल किया गया है, जिसे आधुनिक बोहर सिद्धांत के साथ पढ़ाया जाएगा.
मानव विज्ञान में चारक, सुश्रुत, बुद्ध और महावीर जैसे प्राचीन भारतीय विचारकों के प्रकृति और संस्कृति के बीच संबंधों पर विचार शामिल होंगे. यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत शिक्षा को 'डीकोलोनाइज' करने और भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने के लक्ष्य के अनुरूप है.
हालांकि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति बहुविषयक शिक्षा को प्रोत्साहित करती है, लेकिन इस पाठ्यक्रम में ज्यादातर क्रेडिट एकल विषय पर केंद्रित हैं.
उदाहरण के लिए, बीएससी रसायन विज्ञान (ऑनर्स) में 172 क्रेडिट में से 96 क्रेडिट मुख्य विषय के लिए, 32 क्रेडिट विषय-विशिष्ट वैकल्पिक और केवल 9 क्रेडिट सामान्य वैकल्पिक विषयों के लिए हैं. वाणिज्य में भी क्रेडिट का ऐसा ही बंटवारा है, जिससे बहुविषयक पढ़ाई के लिए कम जगह बचती है.
इस पाठ्यक्रम को लेकर कुछ विवाद भी है. कुछ विपक्षी शासित राज्यों ने इसे 'भगवाकरण' का प्रयास बताकर विरोध किया है. खास तौर पर, रसायन विज्ञान के पाठ्यक्रम में सरस्वती की स्तुति और इतिहास में वी.डी. सावरकर की पुस्तक 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' को शामिल करने पर सवाल उठ सकते हैं.
यूजीसी का कहना है कि यह पाठ्यक्रम भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर छात्रों को समग्र विकास के लिए तैयार करेगा.