छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक बदलावों की आहट के बीच नेतृत्व को लेकर अंदरूनी घमासान एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बीच चल रही जुबानी जंग ने राज्य के राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है. इन दोनों दिग्गज नेताओं की बयानबाजी को आगामी दिनों में संगठन के भीतर होने वाले बड़े फेरबदल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
इस सियासी हलचल के बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने अपनी भावी भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी वे खुद को युवाओं की तरह ऊर्जावान महसूस करते हैं.
सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि आलाकमान उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेगा, वे उसे पूरी मुस्तैदी से निभाएंगे. फिलहाल उनका पूरा ध्यान सरगुजा संभाग, अंबिकापुर और पूरे प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर संगठन को नई ताकत देने पर है. पिछले विधानसभा चुनाव में मिली निजी हार को पीछे छोड़ते हुए वे अब लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं.
दूसरी तरफ, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के उस बयान ने भी हवा दे दी है जिसमें उन्होंने सिंहदेव को राष्ट्रीय राजनीति में जाने की सलाह दी थी. बैज ने कहा था कि सिंहदेव जैसे कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं को अब केंद्रीय स्तर पर अपनी सेवाएं देनी चाहिए ताकि राज्य में नई पीढ़ी और युवा चेहरों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके.
राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बयानबाजी तब शुरू हुई जब सिंहदेव ने कथित तौर पर प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने की इच्छा जाहिर की थी, जिसके बाद उन्होंने दक्षिण छत्तीसगढ़ के इलाकों का दौरा भी किया था.
हालांकि, सिंहदेव ने बैज के बयान पर सधे हुए अंदाज में पलटवार करते हुए उन्हें एक होनहार युवा नेता बताया और कहा कि बैज में भविष्य का मुख्यमंत्री बनने की क्षमता है.
कांग्रेस के इस अंदरूनी घमासान पर सत्ताधारी दल भाजपा ने भी चुटकी लेने में देर नहीं की.
राज्य सरकार के मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दल की अंतर्कलह एक बार फिर जनता के सामने आ गई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर नेता एक-दूसरे के वजूद को स्वीकार नहीं पा रहे हैं. नेताम ने सिंहदेव के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि पिछली सरकार बनाने में उनका अहम योगदान था, लेकिन पार्टी ने उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे. उन्होंने सिंहदेव को मौजूदा राजनीतिक हालातों को भांपते हुए फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है.