रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

USTR में बाघ के शिकार का पर्दाफाश, ओडिशा से जुड़े तार, 7 गिरफ्तार

C

CG Khabar

19 मई 2026, 08:28 PM 4 मिनट में पढ़ें 2

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक खौफनाक और बड़ी बाघ शिकार साजिश का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह महज एक शिकार का मामला नहीं, बल्कि एक बकायदा कांट्रैक्ट किलिंग (सुपारी देकर हत्या) की साजिश थी, जिसके तार ओडिशा के एक संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क और खरीदारों से जुड़े हुए हैं. 


इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए अब बाघ अभयारण्य प्रशासन ने केंद्रीय जांच एजेंसियों, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) से मदद मांगी है, ताकि अंतरराज्यीय तस्करी के इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जा सके.

विज्ञापन


जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के खारीमाला गांव का 76 वर्षीय बुजुर्ग रमन हेर्ना है. आरोप है कि हेर्ना ने एक बाघ को मारने के लिए जालंधर बगारती नाम के व्यक्ति को मोटी रकम की सुपारी दी थी. कड़ी पूछताछ के दौरान जब रमन हेर्ना का सामना जालंधर बगारती से कराया गया, तो हेर्ना ने तुरंत उसकी पहचान कर ली. 


इसके साथ ही उसने बगारती के सगे भतीजे हांगुल बाचा का नाम भी उजागर किया, जिसने बाघ की खाल का सौदा तय किया था. पूछताछ में खुद को फंसता देख जालंधर बगारती ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपने ही भतीजे से दूरी बनाने की कोशिश शुरू कर दी है.


इस अंतरराज्यीय शिकार गिरोह की भनक वन विभाग की खुफिया टीम को पहले ही लग गई थी. इनपुट मिले थे कि ओडिशा के नुआपाड़ा का एक सक्रिय गुट रिजर्व क्षेत्र में बाघ का शिकार करने की फिराक में घूम रहा है. इस इनपुट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एंटी-पोचिंग (शिकार रोधी) टीमों ने सीमावर्ती पहाड़ी जंगलों में गश्त बढ़ा दी और अस्थायी जांच चौकियां स्थापित कर दीं. 


इसी सतर्कता के चलते 9 मई को मुख्य आरोपी रमन हेर्ना को हिरण के सींगों के साथ दबोच लिया गया. हेर्ना ने कुबूल किया कि उसने बाघ की खाल का इंतजाम करने और जहर व तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियारों से बाघ को मारने के लिए कटफाड़ और कुसुमखुंटा गांव के लोगों से संपर्क साधा था. इसके बाद 10 मई को जालंधर बगारती को भी हिरासत में ले लिया गया.


उसी दिन एक और बड़ी कामयाबी तब मिली जब गश्ती दल ने कटफाड़ गांव के छह अन्य शिकारियों को कुल्हाड़ीघाट रेंज के रानीबोरझोला नाले में जहर मिलाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. यह नाला बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों का प्रमुख जल स्रोत है. पकड़े गए आरोपियों की पहचान बुधराम पहाड़िया, अनंतराम पहाड़िया, मनलाल पहाड़िया, डिगीसन पहाड़िया, धनु चिड़ा और मधुरम पहाड़िया के रूप में हुई है, जो सभी ओडिशा के निवासी हैं. 


अधिकारियों ने बताया कि ये शिकारी अच्छी तरह जानते थे कि इस प्राकृतिक जल स्रोत का उपयोग गर्मी के दिनों में वन विभाग के कर्मचारी और दैनिक वेतन भोगी चौकीदार भी पीने के पानी के लिए करते हैं. ऐसे में पानी में जहर मिलाना न केवल बाघ, तेंदुए, भालू और हिरण जैसे बेजुबान जानवरों के लिए, बल्कि इंसानी जिंदगी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी एक बेहद गंभीर अपराध है.


गिरफ्तार किए गए इन छह आरोपियों को 11 और 12 मई को राजिम की जेएमएफसी (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. मौके से बरामद जहर के नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर की प्रयोगशाला में भेजा गया है. वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की सख्त धाराओं के अलावा, पुलिस को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है. 


इनमें सार्वजनिक जल स्रोत को दूषित करने (धारा 274), जहरीले पदार्थों से जनजीवन संकट में डालने (धारा 277), व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा पैदा करने (धारा 125), आपराधिक साजिश व संगठित वन्यजीव अपराध (धारा 61-2) और साझा इरादे (धारा 3-5) की धाराएं शामिल हैं.


फिलहाल, इस रैकेट के एक और मुख्य आरोपी हांगुल बाचा की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग और पुलिस ने प्रयास तेज कर दिए हैं. विभाग ने फरार हांगुल बाचा की सूचना देने वाले के लिए 10,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है और भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी. 


अधिकारियों को आशंका है कि इस बड़ी साजिश में सीमावर्ती गांवों के कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं. एहतियात के तौर पर पूरे उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. 


ओडिशा सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और शिकार की किसी भी भविष्य की कोशिश को नाकाम करने के लिए चौबीसों घंटे जमीनी गश्त के साथ-साथ अब थर्मल कैमरों से लैस अत्याधुनिक ड्रोनों की मदद ली जा रही है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP