छत्तीसगढ़ में अफीम की तीसरी खेती का पर्दाफाश
बलरामपुर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती का एक और बड़ा मामला सामने आया है. कुसमी के बाद अब कोरंधा थाना क्षेत्र के ग्राम खजूरी (तुर्रीपानी) में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने करीब ढाई एकड़ जमीन पर लहलहाती अफीम की फसल को जब्त कर नष्ट कर दिया है.
झारखंड सीमा से सटे इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में हुई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 18 क्विंटल वजन के 285 बोरे अफीम के पौधे बरामद किए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग पौने दो करोड़ रुपये आंकी गई है.
यह पूरी कार्रवाई मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में संपन्न हुई, जिसमें तीन ट्रैक्टरों के जरिए फसल को थाने लाया गया.
इस मामले में पुलिस ने दो स्थानीय किसानों, सहादुर नगेशिया और टुईला राम को हिरासत में लिया है. पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि किसानों को अंधेरे में रखकर यह खेती कराई जा रही थी.
किसानों ने बताया कि झारखंड के चतरा निवासी भूपेंद्र उरांव ने उन्हें 'कीमती मसाले' की खेती का झांसा दिया था. तस्करों ने किसानों को मोटा मुनाफा देने का लालच दिया और जमीनें लीं, जबकि फसल की देखरेख और पहरेदारी के लिए झारखंड से ही मजदूर बुलाए गए थे. पुलिस के पहुंचने से पहले ही मुख्य आरोपी और मजदूर फरार होने में कामयाब रहे.
जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि तस्करों ने इस दुर्गम क्षेत्र को जानबूझकर चुना क्योंकि यहाँ का रास्ता बेहद कठिन है और सामान्यतः सरकारी अमला यहाँ तक नहीं पहुँच पाता. यहाँ तक कि पटवारी रिकॉर्ड में भी इस जमीन पर अन्य फसलों का जिक्र था.
सूत्रों के अनुसार, झारखंड में सैटेलाइट निगरानी और कड़ी सख्ती के कारण तस्करों ने अब छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त की है. फिलहाल, बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर के निर्देशन में पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं और जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों का सर्वे कराया जा रहा है ताकि इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके.