TET परीक्षा: रिजल्ट के बाद वर्ग सुधारने की मांग HC से खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के सात अभ्यर्थियों को एक बड़ा झटका दिया है. अदालत ने उन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अपना वर्ग 'ओबीसी क्रीमी लेयर' से बदलकर 'ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर' करने की मांग की गई थी. मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नतीजों के बाद इस तरह के बदलाव की अनुमति देने से पूरी परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित होगी.
यह आदेश जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) और उसके परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरते समय उनसे अनजाने में 'ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर' की जगह 'ओबीसी क्रीमी लेयर' का विकल्प चुन गया था, जबकि वे वास्तव में नॉन-क्रीमी लेयर के अंतर्गत आते हैं.
एक गलती और हाथ से गया मौका
मामले से जुड़ी एक याचिका में एक महिला अभ्यर्थी ने बताया कि उसने 1 फरवरी को आयोजित टेट परीक्षा में 150 में से 80 अंक हासिल किए थे. चूंकि आवेदन में उनका वर्ग ओबीसी क्रीमी लेयर (सामान्य के समकक्ष) दर्ज था, इसलिए उन्हें पास होने के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत यानी 90 अंकों की आवश्यकता थी, जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया. अभ्यर्थी की दलील थी कि यदि वर्ग सुधार कर उन्हें ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर में शामिल किया जाता, तो वे पात्रता अंकों में छूट का लाभ पाकर परीक्षा उत्तीर्ण कर लेतीं.
दूसरी ओर, व्यापमं के वकील अविनाश सिंह ने याचिकाओं का कड़ा विरोध किया. उन्होंने अदालत को बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि 8 दिसंबर के बाद अभ्यर्थियों को अपनी त्रुटियां सुधारने के लिए 9 दिसंबर से 11 दिसंबर 2025 तक का पर्याप्त समय दिया गया था. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में आए हाई कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें इस तरह की मांगों को पहले ही खारिज किया जा चुका है.
अदालत की कड़ी टिप्पणी
हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आवेदन पत्र को सही-सही भरना पूरी तरह से उम्मीदवार की जिम्मेदारी है. एक बार सुधार की समय-सीमा समाप्त हो जाने के बाद, आवेदन में दी गई जानकारियां अंतिम मान ली जाती हैं और उन्हीं के आधार पर मूल्यांकन व परिणाम तैयार किए जाते हैं.
जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि परिणाम आने के बाद श्रेणी बदलने की अनुमति देने से परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म होगी और भविष्य में ऐसे दावों की बाढ़ आ जाएगी, जिससे दूसरे उम्मीदवारों के अधिकारों और पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बुरा असर पड़ेगा.