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स्वाइन फ्लू: दुर्ग और बिलासपुर में 13 मरीज मिले, 9 स्वस्थ हुए, 4 मरीज सक्रिय

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28 अग. 2026, 12:48 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

Swine Flu
Swine Flu

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मौसम के बदलते ही मौसमी बीमारियों के साथ-साथ स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का खतरा तेजी से फैल रहा है. अस्पतालों में रोजाना सर्दी, खांसी और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. संक्रमण की इस आहट को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है. विभाग ने सभी संदिग्ध मामलों की तुरंत जांच करने और कड़ी निगरानी रखने के कड़े निर्देश जारी किए हैं.


अब तक राज्य के दो प्रमुख जिलों दुर्ग और बिलासपुर से कुल 13 स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से दुर्ग जिले में 6 और बिलासपुर जिले में 7 मरीजों की पुष्टि हुई है. राहत की बात यह है कि कुल 13 मरीजों में से 9 लोग इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं.


फिलहाल 4 सक्रिय मरीजों का अस्पताल में इलाज जारी है. दुर्ग के दो संक्रमितों में से एक का उपचार एम्स रायपुर और दूसरे का सेक्टर-9 अस्पताल में चल रहा है. वहीं बिलासपुर के दो मरीजों का इलाज अपोलो अस्पताल में जारी है, जिनमें से एक 30 वर्षीय मरीज की हाल ही में रायपुर यात्रा की ट्रैवल हिस्ट्री मिली है. अपोलो में भर्ती 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हालत में सुधार के बाद उन्हें आईसीयू से बाहर शिफ्ट कर दिया गया है.


बढ़ते मामलों से निपटने के लिए जिला अस्पतालों में संदिग्ध रोगियों के लिए विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टरों से परामर्श लें. विशेष रूप से उन लोगों को अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है जो हाल ही में प्रभावित क्षेत्रों से लौटे हैं या किसी मरीज के संपर्क में आए हैं.


इससे पहले दुर्ग में एक तीन साल की लड़की स्वाइन फ्लू ग्रसित होकर निजी अस्पताल में भर्ती थी जहां से स्वस्थ होकर घर लौट आई है.


स्वाइन फ्लू कितना खतरनाक है?


स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा 'ए' वायरस के एक उपप्रकार H1N1 के कारण होने वाला एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है. शुरुआत में यह वायरस सूअरों से इंसानों में फैला था, लेकिन अब यह आम मौसमी फ्लू की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स (छींकने या खांसने) के जरिए आसानी से फैलता है.


स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, लगातार तेज खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द, अत्यधिक थकान और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं. कुछ मामलों में, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में, उल्टी और दस्त जैसे पाचन संबंधी लक्षण भी देखे जाते हैं.


स्वाइन फ्लू की केस फेटेलिटी रेट (मृत्यु दर) आमतौर पर 0.01% से 0.1% के बीच बहुत कम मानी जाती है. हालांकि, बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों (जैसे मधुमेह, हृदय या फेफड़ों की बीमारी) से पीड़ित उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में यह निमोनिया और अन्य जटिलताओं का रूप लेकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.


खतरनाक होने के मामले में स्वाइन फ्लू को कोरोना वायरस (COVID-19) की तुलना में कम खतरनाक माना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वैश्विक चिकित्सा आंकड़ों के अनुसार कोरोना वायरस, स्वाइन फ्लू की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है, इसका इनक्यूबेशन पीरियड लंबा होता है और इसकी मृत्यु दर स्वाइन फ्लू से लगभग 10 गुना अधिक रही है. स्वाइन फ्लू के लिए असरदार एंटीवायरल दवाएं (जैसे ओसेल्टामिविर/टेमीफ्लू) और वार्षिक टीके पहले से ही व्यापक रूप से उपलब्ध हैं.


छत्तीसगढ़ के अलावा भारत में मानसून और मौसम के बदलाव के दौरान दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप सबसे अधिक देखा जा रहा है, जहां इस साल मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा कर्नाटक (विशेष रूप से बेंगलुरु), महाराष्ट्र, गुजरात और केरल जैसे राज्यों में भी H1N1 स्वाइन फ्लू के सक्रिय मामले लगातार सामने आ रहे हैं.


 स्वाइन फ्लू (H1N1) के संक्रमण से खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:


व्यक्तिगत स्वच्छता


हाथों की नियमित सफाई: हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं, विशेषकर बाहर से घर लौटने पर या किसी सतह को छूने के बाद.


सैनिटाइज़र का उपयोग: पानी उपलब्ध न होने पर 60% या उससे अधिक अल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें.


चेहरे को न छूएं: बिना हाथ धोए अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें, क्योंकि वायरस यहीं से शरीर में प्रवेश करता है.


मास्क और श्वसन शिष्टाचार


मास्क का प्रयोग: भीड़भाड़ वाली जगहों, अस्पतालों या सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करते समय मास्क जरूर पहनें.


खांसते-छींकते समय सावधानी: खांसते या छींकते समय अपनी नाक और मुंह को टिश्यू या कोहनी से ढकें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत ढक्कन वाले कूड़ेदान में फेंक दें.


दैनिक दिनचर्या और दूरी


संक्रमितों से दूरी: सर्दी, खांसी या बुखार से पीड़ित व्यक्तियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें.


भीड़ से बचाव: फ्लू के मौसम में अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें.


सतहों की सफाई: घर और कार्यस्थल में बार-बार छुई जाने वाली सतहों (जैसे दरवाजे के हैंडल, स्विच board, फोन और टेबल) को नियमित रूप से डिसइन्फेक्ट करें.


इम्युनिटी और खान-पान


पोषक आहार: विटामिन-सी युक्त फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त पानी और पौष्टिक भोजन का सेवन करें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत रहे.


पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की पूरी नींद लें और तनाव से बचें.


टीकाकरण और लक्षण दिखने पर


फ्लू वैक्सीन: हर साल डॉक्टर की सलाह पर मौसमी फ्लू (H1N1) का टीका लगवाएं, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद उपयोगी है.


लक्षण दिखने पर होम आइसोलेशन: यदि आपको सर्दी, खांसी, तेज बुखार या बदन दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो खुद को घर पर आइसोलेट कर लें और तुरंत नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP