अनिल टुटेजा की याचिका पर SC ने केंद्र, CBI, ED से जवाब मांगा
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शराब घोटाले के मामलों में गिरफ्तार पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की याचिका पर केंद्र, सीबीआई, ईडी और छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा है. टुटेजा ने कई जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज की गई कम से कम 11 प्राथमिकी (FIRs) में आगे किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां तथा न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने पूर्व आईएएस अधिकारी की ओर से पेश वकीलों, अर्शदीप सिंह खुराना और मलक भट्ट की दलीलों पर ध्यान दिया और जांच एजेंसियों से जवाब मांगा.
प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के अलावा, टुटेजा ने अपनी याचिका में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, केंद्रीय वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग को भी पक्षकार बनाया है. टुटेजा कथित तौर पर पिछली कांग्रेस के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार के करीबी थे.
याचिका में 11 लंबित आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा गया है, "न्याय के हित में, प्रतिवादी अधिकारियों को इस मामले के अंतिम निर्णय तक, उनके पास पहले से मौजूद सामग्री के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई और दंडात्मक कदम उठाने से रोका जाए."
याचिका में कई जांच एजेंसियों द्वारा evergreening of arrests की "प्रतिशोधात्मक" रणनीति का आरोप लगाया गया है, जिसका उद्देश्य उनकी कैद को अनिश्चित काल तक बढ़ाना है.
पूर्व नौकरशाह ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 27 जून के उस आदेश को चुनौती देते हुए यह अपील दायर की है, जिसमें विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगातार गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग वाली उनकी याचिका को non-maintainable बताते हुए खारिज कर दिया गया था.
याचिका में कहा गया है कि "विनम्र याचिकाकर्ता, जो पिछले 14 महीनों से हिरासत में है, ने यह विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है. उन्हें पहले 21 अप्रैल, 2024 को और बाद में दो क्रमिक मामलों में गिरफ्तार किया गया था. ये सभी गिरफ्तारियाँ छत्तीसगढ़ राज्य में शराब घोटाले से संबंधित एक ही आरोपों और कथित लेनदेन से संबंधित हैं."
छत्तीसगढ़ में 34 वर्षों से अधिक सेवा देने वाले सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी टुटेजा ने आरोप लगाया है कि उन्हें कथित NAN (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले में दोष लेने से इनकार करने और 2013-2018 के दौरान तत्कालीन सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग करने के बाद 2015 से व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है.
याचिका में दावा किया गया है कि "वास्तविक अपराधियों" की भूमिका को उजागर करने के उनके प्रयासों से प्रतिशोध का एक दशक लंबा सिलसिला शुरू हुआ, जो दिसंबर 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद और तेज हो गया.
याचिका में दावा किया गया है कि पांच अलग-अलग एजेंसियों ने 10 वर्षों में कई बार उनके यहां छापे मारे हैं, लेकिन कभी भी कोई बेहिसाब संपत्ति या अपराध की आय बरामद नहीं हुई है. इसके बावजूद, जांच एजेंसियां उन्हें लगातार मुकदमे से पहले की कैद में रखने के लिए "राज्य मशीनरी को हथियार बना रही हैं".
याचिका में कई प्राथमिकी (FIRs) और ECIRs के तहत सिलसिलेवार गिरफ्तारियों का विवरण दिया गया है और कहा गया है कि आरोप अतिव्यापी हैं और ये कार्रवाई उनकी हिरासत को "सदाबहार" रखने के उद्देश्य से की गई हैं.
याचिका में कहा गया है कि पूर्व अधिकारी ने तीन अलग-अलग मामलों में 14 महीने से अधिक जेल में बिताए हैं, ये सभी कथित तौर पर शराब और घोटाले के मामलों से जुड़े हैं.
याचिका के अनुसार, कुछ मामलों में जमानत मिलने और कुछ कार्यवाही रद्द होने के बावजूद, एजेंसियां यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह सलाखों के पीछे रहें, insurance arrests के रूप में नई प्राथमिकी "आरक्षित" रखती हैं.
याचिका में विभिन्न याचिकाओं पर शीर्ष अदालत के आदेशों का हवाला दिया गया है और कहा गया है कि अप्रैल 2024 में, शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ ईडी के एक मामले को रद्द कर दिया था. इसके बाद, मई 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया गया था.