महिला वकीलों के लिये जिला से तालुका अदालतों तक अलग बार रूम और शौचालय बनाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
देश की हर अदालत में अब महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं होंगी. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि महिला वकीलों की संख्या कम हो या ज्यादा, सुविधाओं के निर्माण में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.
नई दिल्ली । डेस्क: सर्वोच्च न्यायालय ने देश की न्यायिक प्रणालियों में महिला अधिवक्ताओं की कार्यस्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने देश के सभी राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे जिला, उप-विभागीय और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए विशेष बार रूम, अलग शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराएं.
अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इन सुविधाओं के निर्माण के लिए अतिरिक्त धन या भूमि की आवश्यकता पड़ती है, तो भी राज्यों को इस व्यवस्था को तुरंत लागू करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह सुविधा हर उस अदालत परिसर में उपलब्ध कराई जानी चाहिए जहां महिला वकील प्रैक्टिस करती हैं, भले ही वहां उनकी संख्या कितनी भी कम क्यों न हो.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम का न होना बेहद गंभीर चिंता का विषय है और इसे न्याय प्रणाली का अनिवार्य कर्तव्य मानते हुए पूरा किया जाना चाहिए.
इस पूरे अभियान में एकरूपता और तेजी लाने के लिए अदालत ने भारत के महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) आर. वेंकटरमणी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रगति रिपोर्ट एकत्र कर अनुपालन की निगरानी करेंगे.
यह महत्वपूर्ण निर्देश महिला अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए गए, जिसमें देशभर के अदालत परिसरों में महिलाओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया गया था.
मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी और याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि कई राज्यों में स्थिति काफी दयनीय है, जहां दर्जनों अदालत परिसरों के बीच गिने-चुने शौचालयों की व्यवस्था है और कुछ प्रमुख शहरों की अदालतों में भी महिलाओं के लिए अलग बार रूम मौजूद नहीं हैं.
अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में वह अपने आदेशों के क्रियान्वयन के चरण में है और इसमें किसी भी प्रकार का विचलन स्वीकार नहीं किया जाएगा. उच्च न्यायालयों की ढांचागत समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे नई और पुरानी दोनों प्रकार की अदालती इमारतों के डिजाइन में इन बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दें.
इस मामले में अगली सुनवाई दिसंबर की शुरुआत में तय की गई है, जिससे पहले सभी राज्यों के महाधिवक्ताओं को अपनी प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होगी.