मंगल, 27 अक्टू. 2026

CGKhabar

ब्राजील में लूला डा सिल्वा की जीत से अमेरिका के वर्चस्व और दुर्लभ खनिजों की होड़ को लगा झटका

लूला डा सिल्वा ने फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार ब्राजील की कमान संभाली. इस जीत से अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच ब्राजील की तटस्थ और संप्रभु विदेश नीति को नया बल मिला है. ब्राजील के पास मौजूद विशाल दुर्लभ खनिज (Rare Earth Reserves) आने वाले वर्षों में अत्यधिक रणनीतिक महत्व हासिल करने वाले हैं.

C

CG Khabar

27 अक्टू. 2026, 12:38 AM 3 मिनट में पढ़ें 31

लूला डा सिल्वा
लूला डा सिल्वा

नई दिल्ली । डेस्क: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए चौथी बार देश की बागडोर संभाल ली है. 80 वर्षीय लूला ने कड़े मुकाबले वाले रन-ऑफ चुनाव में 51.8 प्रतिशत वोट हासिल कर अपने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लेवियो बोल्सोनारो को शिकस्त दी. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले फ्लेवियो ने फिलहाल अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. लूला की इस जीत को वैश्विक पटल पर बीजिंग के सबसे महत्वपूर्ण आधार को सुरक्षित रखने और वाशिंगटन के प्रभाव को संतुलित करने के रूप में देखा जा रहा है.

चीन ने जताई खुशी, मजबूत रिश्तों का दिया भरोसा

बीजिंग ने चुनाव नतीजों का गर्मजोशी से स्वागत किया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने लूला को बधाई देते हुए स्पष्ट किया कि चीन और ब्राजील एक साझा भविष्य का निर्माण करने के लिए सहयोग आगे बढ़ाने को तत्पर हैं. ब्राजील लैटिन अमेरिका में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. लूला की जीत यह सुनिश्चित करती है कि देश की कमान एक ऐसे अनुभवी नेता के हाथों में रहे जो किसी भी गुट में शामिल न होने की स्वतंत्र नीति का समर्थक है. इससे पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी दबदबा कायम करने की वाशिंगटन की रणनीतिक कोशिशों को झटका लगा है.

विज्ञापन

दुर्लभ खनिजों और संसाधनों की होड़ में ब्राजील का संतुलित रुख

विशेषज्ञों के अनुसार, लूला का यह कार्यकाल वैश्विक संसाधन प्रतिस्पर्धा में ब्राजील की स्थिति को बेहद मजबूत बनाएगा. ब्राजील के पास मौजूद विशाल दुर्लभ खनिज (Rare Earth Reserves) आने वाले वर्षों में अत्यधिक रणनीतिक महत्व हासिल करने वाले हैं. अमेरिकी और चीनी हितों के बीच संतुलन बनाते हुए लूला ब्राजील के लिए सर्वोत्तम शर्तें हासिल करने की क्षमता रखते हैं. वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी बोल्सोनारो चीन को एक वैचारिक विरोधी के रूप में देखते थे. लूला का स्पष्ट रुख है कि ब्राजील किसी भी देश का पिछवाड़ा नहीं बनेगा और वह अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे.

ब्रिक्स संगठन और वैश्विक कूटनीति पर सकारात्मक प्रभाव

लूला की जीत ने ब्रिक्स (BRICS) समूह को भी बड़ी राहत दी है. चुनाव से पहले ऐसी चिंताएं जताई जा रही थीं कि यदि ब्राजील में सत्ता परिवर्तन होता है तो देश इस उभरते बाजार गुट से बाहर हो सकता है. अब यह स्पष्ट हो गया है कि ब्राजील वैश्विक स्तर पर अपनी सहभागिता बनाए रखेगा. अमेरिकी हस्तक्षेप की वजह से लूला प्रशासन का झुकाव बीजिंग की ओर अधिक देखने को मिल सकता है. उच्च तकनीक परियोजनाओं और ग्लोबल साउथ के सहयोग में दोनों देशों के बीच आने वाले दिनों में और अधिक तालमेल देखने को मिलेगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
नेतन्याहू
देश-विदेश

ऐतिहासिक मोड़ पर इजराइल: आम चुनाव में नेतन्याहू की साख दांव पर

19 मिनट पहले

जोहरान ममदानी- न्यूयॉर्क के मेयर
देश-विदेश

"एकजुट जनता कभी पराजित नहीं हो सकती": न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी

एक घंटा पहले

AI Generated Photo
देश-विदेश

प्रेस की आजादी पर ट्रंप से सीधी टक्कर: मीडिया संस्थानों के बाद अब अमेरिकी जनता पहुंची अदालत

एक घंटा पहले

ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड
देश-विदेश

पश्चिम बंगाल: कोयला खदान में लिफ्ट खराब होने से 50 मीटर नीचे फंसे कई मजदूर

एक घंटा पहले

चुनाव आयोग
देश-विदेश

सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग का दावा: सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से हुए

2 घंटे पहले

बांध- File Photo
देश-विदेश

तिब्बत में दुनिया का सबसे बड़ा बांध: भारत-बांग्लादेश में बाढ़ के खतरे की चीनी वैज्ञानिकों की चेतावनी

5 घंटे पहले

CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP