ब्राजील में लूला डा सिल्वा की जीत से अमेरिका के वर्चस्व और दुर्लभ खनिजों की होड़ को लगा झटका
लूला डा सिल्वा ने फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार ब्राजील की कमान संभाली. इस जीत से अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच ब्राजील की तटस्थ और संप्रभु विदेश नीति को नया बल मिला है. ब्राजील के पास मौजूद विशाल दुर्लभ खनिज (Rare Earth Reserves) आने वाले वर्षों में अत्यधिक रणनीतिक महत्व हासिल करने वाले हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए चौथी बार देश की बागडोर संभाल ली है. 80 वर्षीय लूला ने कड़े मुकाबले वाले रन-ऑफ चुनाव में 51.8 प्रतिशत वोट हासिल कर अपने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लेवियो बोल्सोनारो को शिकस्त दी. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले फ्लेवियो ने फिलहाल अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. लूला की इस जीत को वैश्विक पटल पर बीजिंग के सबसे महत्वपूर्ण आधार को सुरक्षित रखने और वाशिंगटन के प्रभाव को संतुलित करने के रूप में देखा जा रहा है.
चीन ने जताई खुशी, मजबूत रिश्तों का दिया भरोसा
बीजिंग ने चुनाव नतीजों का गर्मजोशी से स्वागत किया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने लूला को बधाई देते हुए स्पष्ट किया कि चीन और ब्राजील एक साझा भविष्य का निर्माण करने के लिए सहयोग आगे बढ़ाने को तत्पर हैं. ब्राजील लैटिन अमेरिका में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. लूला की जीत यह सुनिश्चित करती है कि देश की कमान एक ऐसे अनुभवी नेता के हाथों में रहे जो किसी भी गुट में शामिल न होने की स्वतंत्र नीति का समर्थक है. इससे पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी दबदबा कायम करने की वाशिंगटन की रणनीतिक कोशिशों को झटका लगा है.
दुर्लभ खनिजों और संसाधनों की होड़ में ब्राजील का संतुलित रुख
विशेषज्ञों के अनुसार, लूला का यह कार्यकाल वैश्विक संसाधन प्रतिस्पर्धा में ब्राजील की स्थिति को बेहद मजबूत बनाएगा. ब्राजील के पास मौजूद विशाल दुर्लभ खनिज (Rare Earth Reserves) आने वाले वर्षों में अत्यधिक रणनीतिक महत्व हासिल करने वाले हैं. अमेरिकी और चीनी हितों के बीच संतुलन बनाते हुए लूला ब्राजील के लिए सर्वोत्तम शर्तें हासिल करने की क्षमता रखते हैं. वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी बोल्सोनारो चीन को एक वैचारिक विरोधी के रूप में देखते थे. लूला का स्पष्ट रुख है कि ब्राजील किसी भी देश का पिछवाड़ा नहीं बनेगा और वह अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे.
ब्रिक्स संगठन और वैश्विक कूटनीति पर सकारात्मक प्रभाव
लूला की जीत ने ब्रिक्स (BRICS) समूह को भी बड़ी राहत दी है. चुनाव से पहले ऐसी चिंताएं जताई जा रही थीं कि यदि ब्राजील में सत्ता परिवर्तन होता है तो देश इस उभरते बाजार गुट से बाहर हो सकता है. अब यह स्पष्ट हो गया है कि ब्राजील वैश्विक स्तर पर अपनी सहभागिता बनाए रखेगा. अमेरिकी हस्तक्षेप की वजह से लूला प्रशासन का झुकाव बीजिंग की ओर अधिक देखने को मिल सकता है. उच्च तकनीक परियोजनाओं और ग्लोबल साउथ के सहयोग में दोनों देशों के बीच आने वाले दिनों में और अधिक तालमेल देखने को मिलेगा.