शुक्र, 16 अक्टू. 2026

CGKhabar

सुरीली आवाज की मल्लिका सुमन कल्याणपुर का निधन

C

CG Khabar

01 जून 2026, 02:47 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

सुमन कल्याणपुर
सुमन कल्याणपुर

मुंबई | डेस्क: हिंदी सिनेमा और भारतीय संगीत जगत की मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का मुंबई में 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन की खबर से संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. 


उन्होंने 11 भाषाओं में तीन हजार से अधिक फिल्मी और गैर-फिल्मी गीत गाए थे. वर्ष 2023 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था.


सुमन की पारिवारिक मित्रों के अनुसार उन्होंने रविवार रात करीब आठ बजे दुनिया को अलविदा कहा. जीवन के आखिरी दिनों में वे अपने ही गाए गीत सुन रही थीं, मानो अपने सुरों की उस दुनिया को एक बार फिर महसूस कर रही हों, जिसे उन्होंने दशकों तक अपनी आवाज से सजाया था.


उनका अंतिम संस्कार सोमवार को मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में किया जाएगा. परिवार में उनकी बेटी चारू हैं. 


साठ और सत्तर के दशक की पहचान


सुमन का झुकाव बचपन से ही पेंटिंग और संगीत दोनों की ओर था. उन्होंने कला संकाय से पढ़ाई की और शुरू में चित्रकार बनने का सपना देखा था. लेकिन उनके पड़ोसी और पिता के मित्र पंडित केशवराव भोले ने उनकी आवाज में छिपी प्रतिभा को पहचान लिया. उनके सुझाव पर सुमन ने संगीत की शिक्षा शुरू की और धीरे-धीरे यही उनकी पहचान बन गई.


उन्होंने उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे दिग्गजों से संगीत की बारीकियां सीखीं. आगे चलकर वही सुर उनकी जिंदगी बन गए और करोड़ों श्रोताओं की यादों का हिस्सा भी.


1960 और 1970 के दशक में सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग पहचान बनाई. उस दौर में जब लता मंगेशकर का वर्चस्व था, तब भी सुमन ने अपनी प्रतिभा और सुरों की ताकत के दम पर संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई.


‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं. उनकी आवाज में एक ऐसी सादगी और अपनापन था, जो सीधे दिल तक पहुंचता था.


1960 के दशक में जब मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच रॉयल्टी विवाद हुआ, तब संगीतकारों ने सुमन कल्याणपुर को बड़ी संख्या में मौका देना शुरू किया. उन्होंने रफी साहब के साथ कई ऐसे गीत गाए, जो बाद में सुपरहिट साबित हुए और आज भी सदाबहार गीतों की सूची में शामिल हैं.


एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे बचपन से लता मंगेशकर की प्रशंसक थीं और कॉलेज के दिनों में उनके गीत सुना करती थीं. वे मुस्कुराते हुए कहती थीं, “मेरी आवाज पतली और नाजुक थी, मैं क्या कर सकती थी?”


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सुमन कल्याणपुर की मधुर और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाया. उन्होंने कहा कि उनके गीत हमेशा संगीत प्रेमियों और भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों के दिलों में जीवित रहेंगे.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP