सुकमा: मानसिक रूप से दिव्यांग छात्रा से दुष्कर्म, 10 साल की जेल
सुकमा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से जुड़े एक संवेदनशील मामले में दंतेवाड़ा की फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) ने फैसला सुनाया है. अदालत ने मानसिक रूप से दिव्यांग छात्रा के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी अशोक यादव को दोषी ठहराते हुए 10 साल के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है. यह फैसला न्यायाधीश भूपत सिंह साहू की अदालत द्वारा सुनाया गया.
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता 11वीं कक्षा की छात्रा है और मानसिक रूप से कमजोर है. घटना 24 फरवरी 2025 की है, जब वह शाम करीब 4 बजे अपने घर से निकली थी. शाम करीब 6 बजे जब वह घर लौटी, तो रो रही थी. परिजनों द्वारा तुरंत पूछने पर उसने डर के मारे कुछ नहीं बताया.
इसके बाद छात्रा लगातार तीन-चार दिनों तक गुमसुम रही, रोती रही और खाना-पीना छोड़ दिया. 28 फरवरी को जब परिजनों ने प्यार से उससे सख्ती से पूछताछ की, तब उसने अपने साथ हुई आपबीती बयां की.
आत्मानंद स्कूल की बाउंड्री में दिया घटना को अंजाम
पीड़िता ने बताया कि गांव के ही 22 वर्षीय युवक अशोक यादव ने उसे रामाराम स्कूल के पास बुलाया था. इसके बाद आरोपी उसका हाथ पकड़कर जबरदस्ती आत्मानंद स्कूल की बाउंड्री के भीतर ले गया. वहां उसने छात्रा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. जब छात्रा ने विरोध करते हुए उसे धक्का दिया और भागने का प्रयास किया, तो आरोपी ने उसे पकड़कर जमीन पर पटक दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया.
पुलिस जांच और मेडिकल साक्ष्य बने आधार
परिजनों की लिखित शिकायत के आधार पर केरलापाल थाना पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज किया. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीड़िता का महिला चिकित्सा अधिकारी से मेडिकल परीक्षण कराया और रिपोर्ट को केस डायरी में शामिल किया. इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा और पंचनामा तैयार किया और गवाहों के बयान दर्ज किए.
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी अशोक यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन (चार्जशीट) पेश किया.
BNS की धारा 64(2)(ट) में ठहराया गया दोषी
मामला सत्र न्यायालय दंतेवाड़ा (FTC कोर्ट) में चला. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए मेडिकल साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी अशोक यादव को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 64(2)(ट) के तहत दोषी पाया.
अदालत ने जुर्म की गंभीरता को देखते हुए दोषी अशोक यादव को 10 वर्ष की जेल और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. अर्थदंड न देने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.