सर्पदंश मुआवजा घोटाला: तहसील कर्मचारियों की हड़ताल से राजस्व कामकाज ठप
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आए 17.24 करोड़ रुपये के फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस की कार्रवाई के बाद बिलासपुर जिले के राजस्व कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया है. मामले में गिरफ्तार किए गए तीन तहसील रीडर नरेंद्र कौशिक, गरीबराम बिंझवार और हरिशंकर राठौर को निलंबित किए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने सामूहिक कामबंद हड़ताल कर दी, जिससे सोमवार को जिलेभर की तहसील अदालतों में म्यूटेशन, सीमांकन और नामांतरण जैसी जरूरी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं.
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि जांच एजेंसियां केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाकर एकतरफा कार्रवाई कर रही हैं. संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि रीडर केवल दस्तावेजों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करते हैं और केस फाइल का रख-रखाव करते हैं, जबकि मुआवजा स्वीकृत करने का अंतिम अधिकार तहसीलदार के पास होता है.
इसके अलावा पटवारियों के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट या पुलिस पंचनामे की सत्यता जांचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि कई फाइलों में बिना किसी आधिकारिक पत्राचार के फर्जी हस्ताक्षर और मुहरों का इस्तेमाल किया गया था.
पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा एक सुसंगठित नेटवर्क द्वारा चलाया जा रहा था.
गिरोह के सदस्य आरटीआई और अन्य माध्यमों से हाल ही में हुई मौतों की जानकारी जुटाते थे. इसके बाद आत्महत्या, बीमारी या प्राकृतिक मौतों को फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सर्पदंश से हुई मौत में बदल दिया जाता था.
राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के तहत प्रति प्रकरण मिलने वाली 4 लाख रुपये की राशि में से असली लाभार्थियों को महज 20,000 से 50,000 रुपये दिए जाते थे और बाकी राशि आपस में बांट ली जाती थी.
मामले में अब तक डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, राजस्व कर्मचारियों, वकीलों और तहसीलदार के चालकों समेत दो दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस अब सात तहसीलदारों और आठ अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है.
हालांकि, बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस महानिरीक्षक से मिले निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद कर्मचारी संगठनों ने प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल वापस ले ली है, लेकिन सोमवार को हुई कामबंदी से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.