भारत के तकनीकी संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी
नई दिल्ली । डेस्क: अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा जारी 'द स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' की नवीनतम रिपोर्ट ने भारत की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार परिदृश्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, देश के इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों में शिक्षक-छात्र अनुपात अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा निर्धारित मानकों से काफी नीचे है.
जहां AICTE ने इंजीनियरिंग के लिए 1:20 का अनुपात तय किया है, वहीं सरकारी संस्थानों में औसतन 47 छात्रों पर मात्र एक शिक्षक उपलब्ध है. निजी संस्थानों में यह स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन वहां भी प्रति 28 छात्रों पर एक ही शिक्षक है.
रिपोर्ट में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की गुणवत्ता पर भी कड़े सवाल उठाए गए हैं. पिछले कुछ वर्षों में निजी ITIs की संख्या में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन गुणवत्ता के मामले में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ITI प्रशिक्षण और रोजगार के बीच कोई सीधा संबंध नहीं दिख रहा है, क्योंकि इन संस्थानों और विनिर्माण इकाइयों के बीच भौगोलिक तालमेल का अभाव है. आंकड़ों के मुताबिक, 25 वर्ष से कम उम्र के स्नातकों में बेरोजगारी की दर लगभग 40 प्रतिशत है, जो एक गंभीर चुनौती की ओर इशारा करती है.
जनसांख्यिकीय लाभांश के मोर्चे पर रिपोर्ट बताती है कि भारत वर्तमान में अपनी युवा शक्ति के शिखर पर है. साल 2026 में 15 से 29 आयु वर्ग की आबादी लगभग 36.7 करोड़ होने का अनुमान है, लेकिन 2030 के बाद कामकाजी उम्र की आबादी में गिरावट शुरू हो जाएगी.
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि दलित और आदिवासी युवाओं की आकांक्षाएं बदल रही हैं और वे चमड़ा या फुटवियर जैसे पारंपरिक उद्योगों से दूर हट रहे हैं. ऐसे में, यदि अगले दशक में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भारत के लिए अपनी विशाल युवा आबादी को आर्थिक लाभ में बदलना मुश्किल हो जाएगा.