दहेज हत्या के दोषी 87 वर्षीय ससुर को जेल भेजना 'अमानवीय'- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 24 साल पुराने दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि 87 वर्ष के बुजुर्ग को जेल भेजना मानवीय आधार पर उचित नहीं होगा. न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने मामले में ससुर और पति की सजा को बरकरार रखा है, लेकिन पिता-तुल्य आरोपी की शारीरिक स्थिति और उम्र को देखते हुए उन्हें जेल की सजा से छूट दे दी है.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इतनी अधिक उम्र में कारावास न केवल शारीरिक रूप से कष्टदायक होगा, बल्कि यह मानवीय गरिमा के भी विरुद्ध है, क्योंकि बुजुर्ग आरोपी गंभीर शारीरिक कमजोरी और बीमारियों से जूझ रहे हैं.
यह मामला साल 2002 का है, जब शादी के महज 3-4 साल बाद एक महिला अपनी बेटी के साथ संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी. मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि 1 लाख रुपये और अन्य सामान की दहेज की मांग को लेकर उनकी बेटी को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था.
निचली अदालत ने 2005 में पति और ससुर दोनों को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी सही माना है.
हालांकि, जहां 87 वर्षीय ससुर को मानवीय आधार पर राहत मिली है, वहीं 55 वर्षीय पति की अपील खारिज कर दी गई है. अदालत ने पति को अगले आठ सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है ताकि वह अपनी शेष जेल की सजा पूरी कर सके.