छत्तीसगढ़ कोयला परिवहन घोटाला: सौम्या, समीर और रानू साहू जेल से रिहा
छत्तीसगढ़ कोयला परिवहन घोटाला: सौम्या चैरसिया, समीर विश्नोई और रानू साहू रिहा
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कोल परिवहन घोटाले में रायपुर जेल में बंद, आईएएस समीर विश्नोई, आईएएस रानू साहू और राज्य सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया को शनिवार की सुबह जमानत पर रिहा कर दिया गया है. उनके अलावा रजनीकांत तिवारी, वीरेन्द्र जायसवाल और संदीप नायक को भी जमानत पर रिहा किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने गुरुवार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. इन सभी आरोपियों को रिहाई के बाद छत्तीसगढ़ से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है. ताकि ये गवाहों और सबूतों को प्रभावित न कर सकें.
इन सभी के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय ने कोयला परिवहन में प्रति टन 25 रुपये की लेवी वसूलने का मामला दर्ज़ किया था. आरोप था कि इन सभी लोगों ने एक सिंडिकेट बना कर कोयला परिवहन करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन से ऑफलाइन किया और परिवहन की अनुमति केवल उन्हें दी जाती थी, जो 25 रुपये प्रति टन लेवी देते थे.
इडी के अनुसार ऐसा कर के 540 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली की गई, जिसका हिस्सा कई अफसरों और तत्कालीन विधायकों, नेताओं को दिया गया.
बाद में 2024 में राज्य की एसीबी और ईओडबल्यू ने भी इसी मामले में इन तीनों के समेत 35 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.
यही कारण है कि पहले जमानत मिलने के बाद भी नया मामला दर्ज होने के कारण जेल से इनकी रिहाई नहीं हो पाई थी.
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाले के आरोपियों सूर्यकांत तिवारी, रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और अन्य को अंतरिम जमानत दी थी.
सौम्या चौरसिया, रानू साहू और अन्य को इस वर्ष मार्च में छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाला मामले में अंतरिम जमानत दी गई थी, और आरोपी लक्ष्मीकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय और पारेख कुर्रे को मई की शुरुआत में, अन्य मामलों में जमानत की मांग करते हुए आरोपियों द्वारा डीएमएफ घोटाला समेत कुछ नई जमानत याचिकाएं दायर की गईं.
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने अपने समक्ष सूचीबद्ध सभी मामलों में अंतरिम जमानत दे दी. उल्लेखनीय है कि जमानत की शर्तों के तहत न्यायालय ने निर्देश दिया कि आरोपी सूर्यकांत तिवारी, रानू साहू, सौम्या चौरसिया और समीर विश्नोई छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे. न्यायमूर्ति कांत ने तर्क दिया, "ये ऐसे व्यक्ति हैं जो जांच को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं."
आदेश में कहा गया कि "सूर्यकांत तिवारी, रानू साहू, समीर विश्नोई और सौम्या चौरसिया के मामले में, यह निर्देश दिया जाता है कि वे अगले आदेश तक छत्तीसगढ़ राज्य में नहीं रहेंगे, सिवाय इसके कि वे जब भी आवश्यक हो, जांच एजेंसी या ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होंगे. उन्हें यह भी निर्देश दिया जाता है कि वे अपनी रिहाई के 1 सप्ताह के भीतर राज्य के बाहर अपने रहने के पते प्रस्तुत करें. वे अपने रहने के स्थान की सूचना अधिकार क्षेत्र वाले थाने को देंगे...यदि यह पाया गया कि याचिकाकर्ता गवाहों से संपर्क करने और/या उन्हें किसी भी तरह से प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं, तो इसे अंतरिम जमानत का दुरुपयोग माना जाएगा... याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया जाता है कि वे अंतरिम जमानत पर रिहा होते ही अपना पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करा दें...वे जांच में शामिल होंगे और पूरा सहयोग करेंगे."
आदेश सुनाने के बाद, न्यायमूर्ति कांत ने टिप्पणी की, "हम भी प्रथम दृष्टया संतुष्ट हैं...इस एक महिला ने जितनी संपत्ति बनाई है...वह बहुत कुछ कहती है...".
जब अनुरोध किया गया कि सूर्यकांत तिवारी पर जमानत की एक और शर्त लगाई जाए, जिससे उन्हें अपने उन रिश्तेदारों से संपर्क करने से रोका जा सके, जिन्हें अभियोजन एजेंसियों द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं, तो न्यायाधीश ने कहा- "आपको गवाहों में किसी तरह का भरोसा पैदा करना होगा... आप नोटिस जारी कर रहे होंगे लेकिन उन्हें डर है कि अगर वे आएंगे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा... अगर आप इस तरह का माहौल बनाएंगे तो जांच का क्या होगा!? जो लोग जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने में वाकई मददगार हो सकते हैं, उन पर न केवल गवाह सुरक्षा के सिद्धांत लागू होंगे, बल्कि आपको उनमें यह भरोसा भी भरना होगा कि आप उनकी रक्षा करेंगे. तभी वे सच सामने लाएंगे."
तारीखों में जानें ईडी के आरोप
15 जुलाई 2020
तत्कालीन निदेशक, भूविज्ञान एवं खनन विभाग समीर विश्नोई के माध्यम से एक सरकारी आदेश जारी किया गया, जिससे कोयला परिवहन के परमिट की ऑनलाइन प्रक्रिया को मैनुअल कर दिया गया. जांच में यह राज खुला कि यह आदेश एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसमें सूर्यकांत तिवारी ने राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण में उगाही नेटवर्क खड़ा किया.
12 जुलाई 2022
बेंगलुरु के होटल शेराटन ग्रैंड, व्हाइटफ़ील्ड के कमरा नंबर 664 से व्यापारी सूर्यकांत तिवारी के पास से तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए. आयकर विभाग के उप निदेशक पक्कीरेश बदामी ने FIR नंबर 129/2022 दर्ज की, जिसमें IPC की धारा 186, 204, 120-B और 353 के तहत केस हुआ. बाद में IPC की धारा 384 (जबरन वसूली) भी जोड़ी गई.
29 सितंबर 2022
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उपरोक्त FIR के आधार पर ECIR No. RPZO/09/2022 दर्ज किया.
13 अक्टूबर 2022
आईएएस समीर विश्नोई को ईडी ने गिरफ़्तार किया.
2 दिसंबर 2022
सौम्या चौरसिया को ED ने गिरफ्तार किया. उन्हें 6 दिसंबर तक ED की हिरासत में भेजा गया, जिसे 10 दिसंबर तक बढ़ाया गया.
9 दिसंबर 2022
ED ने सूर्यकांत तिवारी के खिलाफ PMLA की धारा 3 और 4 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की.
8 जून 2023
कर्नाटक पुलिस ने सूर्यकांत तिवारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि IPC की धारा 384 के तहत अपराध छत्तीसगढ़ में हुआ है और इस पर वहां की पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए.
16 जून 2023
बेंगलुरु के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने IPC की धारा 204 और 353 के तहत चार्जशीट पर संज्ञान लिया.
27 जून 2023
FIR दर्ज करने वाले बदामी ने कर्नाटक पुलिस की चार्जशीट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की और मामले की आगे की जांच की मांग की.
22 जुलाई 2023
आईएएस रानू साहू को गिरफ़्तार किया गया. उन्हें 3 दिन का रिमांड लेकर ईडी ने पूछताछ की.