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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से भारत के मेडिकल टूरिज्म पर असर

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11 मार्च 2026, 12:59 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

डॉक्टर
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नई दिल्ली । डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता ने भारत के फलते-फूलते मेडिकल टूरिज्म सेक्टर के सामने अनिश्चितता खड़ी कर दी है. भारतीय अस्पतालों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मरीजों, विशेषकर हाई-वैल्यू सर्जरी और जटिल प्रक्रियाओं के लिए आने वाले लोगों की संख्या में शुरुआती सुस्ती देखी जा रही है. 


ब्रिकवर्क रेटिंग्स के मुताबिक, भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार साल 2025 में 8.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जिसके 2030 तक बढ़कर 16.2 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, लेकिन वर्तमान युद्ध जैसी स्थितियों ने अल्पकालिक बाधाएं उत्पन्न कर दी हैं. 

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भारत आने वाले कुल विदेशी मरीजों में एक बड़ा हिस्सा इराक, यमन, ओमान और यूएई जैसे देशों का होता है, जो मुख्य रूप से कार्डियक केयर, ऑन्कोलॉजी, और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे जटिल उपचारों के लिए भारत को चुनते हैं. 


फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के ग्रुप सीओओ अनिल विनायक का कहना है कि हवाई यात्रा में बढ़ते प्रतिबंधों, उड़ानों में व्यवधान और आर्थिक अस्थिरता के कारण हाई-वैल्यू सर्जिकल वॉल्यूम में कमी आ सकती है. फोर्टिस में लगभग 22% विदेशी मरीज मध्य पूर्व से आते हैं, ऐसे में कंपनी अब अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे अन्य बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर जोखिम को कम करने की योजना बना रही है.


नारायणा हेल्थ सिटी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के सूत्रों ने भी स्वीकार किया है कि एयरस्पेस की स्थिति बिगड़ने से समय के प्रति संवेदनशील उपचारों के लिए आने वाले मरीजों की यात्रा में देरी हो रही है. हालांकि, अस्पताल प्रशासन मरीजों और सुविधा प्रदाताओं के साथ समन्वय कर उपचार पुनर्निर्धारित करने में जुटा है ताकि देखभाल की निरंतरता बनी रहे. 


दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट भविष्य में नए अवसर भी पैदा कर सकता है. राधाकृष्ण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की चिकित्सा निदेशक डॉ. विद्या वी. भट्ट और सम्प्रदा अस्पताल के डॉ. राधेश्याम नायक के अनुसार, यद्यपि मरीज अभी यात्रा को लेकर सतर्क हैं, लेकिन भारत की उच्च नैदानिक विशेषज्ञता और किफायती इलाज की साख के कारण लंबी अवधि में अंतरराष्ट्रीय मरीजों का रुझान भारत की ओर और बढ़ सकता है. 


फिलहाल, उद्योग जगत को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में राजस्व और मरीजों की संख्या पर दबाव दिखने की आशंका है, जिसके बाद दूसरी तिमाही से सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP