रायपुर नगर निगम: 84 हजार संपत्ति कर बकायेदारों पर कसेगा शिकंजा
रायपुर । संवाददाता: राजधानी में संपत्तिकर बकायेदारों के खिलाफ रायपुर नगर निगम अब बेहद कड़ा रुख अपनाने जा रहा है. निगम ने शहर के करीब 84 हजार डिफॉल्टर्स को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर ली है. चालू वित्त वर्ष में 400 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के लिए निगम प्रशासन इस समय पूरी ताकत झोंक रहा है.
30 जून तक है छूट का मौका
यह सख्ती ऐसे समय में की जा रही है जब ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले नागरिकों के लिए 6.25 फीसदी की छूट पाने की आखिरी तारीख 30 जून बेहद नजदीक है. निगम अधिकारियों का कहना है कि जहां एक तरफ डिजिटल माध्यमों से टैक्स चुकाने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जानबूझकर टैक्स न देने वालों पर अब सीधा डंडा चलेगा.
जीआईएस तकनीक से पकड़े जा रहे टैक्स चोर:
रायपुर में वर्तमान में कुल 3.46 लाख पंजीकृत संपत्तियां हैं. टैक्स चोरी करने वालों और छुपे हुए बकायेदारों का पता लगाने के लिए इस बार निगम अत्याधुनिक जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) मैपिंग का सहारा ले रहा है.
इसके जरिए जमीन पर बनी वास्तविक इमारतों का मिलान सरकारी टैक्स रिकॉर्ड से किया जा रहा है, जिससे टैक्स छिपाना नामुमकिन हो गया है. हाल ही में चलाए गए वसूली अभियानों के सकारात्मक परिणाम भी दिखे हैं, जहां पीक डेज में रोजाना एक करोड़ रुपये तक का टैक्स कलेक्शन हुआ है.
आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए उठाया कदम:
आरएमसी की उपायुक्त अंजलि शर्मा ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा, "डिफॉल्टर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह अभियान नगर निगम को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है."
उन्होंने 74वें संवैधानिक संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि शहरी स्थानीय निकायों का वित्तीय रूप से स्वतंत्र होना बेहद जरूरी है, ताकि शहर की नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाए रखा जा सके और निगम कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके.
राजस्व बढ़ाने के लिए अन्य मोर्चों पर भी नजर:
400 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम टारगेट को पूरा करने के लिए नगर निगम सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स पर ही निर्भर नहीं है. निगम अपनी करीब 4,000 मार्केट दुकानों के किराए से होने वाली 5 करोड़ रुपये की सालाना आय को बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रहा है.
इसके अलावा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुल्क, विज्ञापन से होने वाली कमाई और प्रशासनिक जुर्मानों के जरिए भी राजस्व बढ़ाने की कवायद तेज कर दी गई है.