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रायपुर: होटल से आभूषण चोरी का जिम्मेदार प्रबंधन, 2.37 लाख चुकाने का आदेश

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08 अग. 2026, 04:04 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

 छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि होटल के कमरे में लॉकर उपलब्ध होने मात्र से होटल प्रबंधन मेहमानों के सामान की चोरी की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता. आयोग ने माना कि होटल में रुकने वाले ग्राहकों की सुरक्षा और उनके सामान की हिफाजत करना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. 


इस मामले में आयोग ने रायपुर के 'वी डब्लू कैनयन' होटल को सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी ठहराते हुए पीड़ित ग्राहक को 2.37 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.


मामला बीकानेर (राजस्थान) के निवासी नरजात सिंह सेठिया से जुड़ा है, जो अपने परिवार के साथ रायपुर के होटल वी डब्लू कैनयन में ठहरे थे. प्रवास के दौरान उनके बंद कमरे से 2,02,500 रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए थे. 


पीड़ित ने सुरक्षा में चूक का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था. इसके जवाब में होटल प्रबंधन ने तर्क दिया था कि कमरे में लॉकर की सुविधा उपलब्ध थी, जिसका इस्तेमाल ग्राहक ने नहीं किया. साथ ही होटल ने बिल न होने और एफआईआर दर्ज कराने में दो दिन की देरी का हवाला देकर दायित्व से मुक्त होने की कोशिश की थी.


राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग के उस पुराने आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें ग्राहक की शिकायत निरस्त कर दी गई थी. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) का हवाला देते हुए राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि सेवा का लाभ लेने वाला व्यक्ति उपभोक्ता की श्रेणी में आता है, केवल भुगतान रसीद न होने के आधार पर उसके अधिकारों को नहीं छीना जा सकता.


आयोग ने कहा कि होटल में सुरक्षा व्यवस्था कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि दी जाने वाली मुख्य सेवा का एक अटूट हिस्सा है. बंद कमरे से चोरी होना सीधे तौर पर होटल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है. 


एफआईआर में हुई देरी पर आयोग ने माना कि पीड़ित ने पहले होटल स्तर पर जांच का इंतजार किया था, इसलिए यह देरी न्यायसंगत है.


राज्य आयोग ने होटल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह 60 दिनों के भीतर पीड़ित को चोरी हुए गहनों की कीमत के रूप में 2,02,500 रुपये, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25,000 रुपये और याचिका खर्च के तौर पर 10,000 रुपये (कुल 2,37,500 रुपये) का भुगतान करे. तय समय सीमा में भुगतान न करने पर होटल को पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP