रायपुर नेता प्रतिपक्ष विवाद खत्म, संदीप को समर्थन
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नगर निगम में पिछले 8 महीने से जारी नेता प्रतिपक्ष का विवाद फिलहाल खत्म हो गया है. कांग्रेस के 8 पार्षदों में से 5 ने आकाश तिवारी का विरोध करते हुए संदीप साहू को समर्थन दे दिया है.
इससे तय हो गया कि संदीप साहू ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे. जबकि संगठन की राय आकाश तिवारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की थी. पार्षदों ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
सभापति सूर्यकांत राठौर ने बताया कि कांग्रेस के सभी पार्षदों से अभिमत लिया गया था, जिसके बाद यह तय हुआ है कि 8 में से 5 पार्षद वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू के साथ खड़े हैं, वहीं कांग्रेस के पार्षदों का कहना है कि आकाश तिवारी के नाम पर कोई सहमति नहीं है.
सभापति सूर्यकांत राठौर का कहना है कि जब तक आधिकारिक रूप से कोई नाम तय नहीं हो जाता है, तब तक नगर निगम में संदीप साहू ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदार निभाएंगे.
संदीप साहू का कहना है कि कांग्रेस के पांच पार्षदों का उन्हें पूरी तरह से समर्थन मिला है. अब आगे सभापति क्या फैसला लेते हैं, यह उनके ऊपर है.
दरअसल, कांग्रेस नेता आकाश तिवारी को पार्टी ने पार्षद का टिकट नहीं दिया था. इसे नाराज होकर आकाश ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.
चुनाव जीतने के बाद वह फिर से पार्टी में शामिल हो गए थे. इसके बाद पार्टी ने संदीप साहू के स्थान पर आकाश तिवारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की घोषणा की.
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष को लेकर विवाद शुरू हो गया. कांग्रेस के पांच पार्षदों ने नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया. बाद में यह चर्चा थी कि सभी ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है.
नेता प्रतिपक्ष को लेकर चल रही खींचतान के बीच सभापति सूर्यकांत राठौर ने इस्तीफा देने वाले 5 पार्षदों के साथ बैठक की. बैठक में जयश्री नायक, दीप मनीराम साहू, रोनिता प्रकाश जगत, संदीप साहू और रेणु जयंत साहू शामिल थे. जबकि 3 पार्षद अर्जुमन ढेबर, शेख मुशीर और आकाश तिवारी इस बैठक में नहीं थे.
बैठक में पार्षदों से पूछा गया कि कांग्रेस संगठन आकाश तिवारी के पक्ष में हैं. इस पर पांचों पार्षदों ने कहा कि हम पार्टी छोड़कर जाने वाले शख्स को नेता प्रतिपक्ष नहीं मानते हैं.
बागी नेता को हमारी सहमति नहीं है. हमने संदीप साहू को ही समर्थन दिया है. इस फैसले के बाद संदीप साहू का पलड़ा भारी हो गया है.
सभापति सूर्यकांत राठौर का कहना है कि नगर निगम में पार्टी द्वारा अधिकृत पार्षद को ही नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की परंपरा है. लेकिन कांग्रेस के पांच पार्षदों ने इसका विरोध किया है. ऐसी स्थिति पहली बार निर्मित हुई है, जब पार्टी के निर्णय के विपरीत पार्षद विरोध कर रहे हैं. ऐसे में जानकारों से राय लेने के बाद ही अंतिम फैसला किया जाएगा.