रायपुर: कांग्रेस के विधानसभा घेराव में 30 हजार कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार कांग्रेस पार्टी ने सत्ता से बाहर होने के बाद अपना अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया. 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के बैनर तले आयोजित इस विशाल विधानसभा घेराव में प्रदेश भर से आए 30,000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
इस प्रदर्शन का नेतृत्व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव जैसे दिग्गज नेताओं ने किया. कांग्रेस का यह उग्र तेवर मुख्य रूप से मनरेगा योजना का नाम बदलने की केंद्र सरकार की कथित कोशिशों, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों और राज्य में बिजली दरों में हुई वृद्धि के विरोध में है.
प्रदर्शन की शुरुआत रायपुर के शंकर नगर स्थित कनाल रोड पर भारत माता चौक से हुई, जहां दोपहर से ही कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटना शुरू हो गया था.
सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि सरकार किसानों को धान खरीदी पर धोखा दे रही है और अब जनहितकारी मनरेगा योजना की पहचान मिटाने की साजिश रच रही है.
सचिन पायलट की मौजूदगी ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता के रूप में रेखांकित किया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घेराव के जरिए कांग्रेस ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह सड़क पर उतरकर एक सजग विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
इस बड़े विरोध प्रदर्शन को देखते हुए रायपुर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया.
शांति नगर तिराहा, भारत माता चौक और आनंद नगर चौक के बीच आवाजाही पूरी तरह बाधित रही, जिससे आम जनता को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा.
आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जो बिलासपुर में हुए पिछले प्रदर्शनों की याद दिलाती है.
कांग्रेस ने इस आंदोलन में धान खरीदी की अधूरी प्रतिबद्धताओं, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और बढ़ते नशे के व्यापार को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है. कुल मिलाकर, राजधानी की सड़कों पर उतरी इस भीड़ ने न केवल भाजपा सरकार को घेरने का काम किया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर नए उत्साह का संचार भी किया है.
घेराव के पीछे के प्रमुख मुद्दे
* केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) के प्रस्तावित नामकरण में बदलाव.
* एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है.
* पूरे राज्य में बिजली की बढ़ती दरें (टैरिफ).
* धान खरीदी की प्रतिबद्धताओं पर किसानों के साथ कथित विश्वासघात.
* बिगड़ती कानून-व्यवस्था और नशीली दवाओं (ड्रग्स) के व्यापार में वृद्धि.