प्रियंका चोपड़ा ने घरेलू कामों के लैंगिक विभाजन पर उठाए सवाल
मुंबई । डेस्क: बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी धाक जमाने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा हमेशा हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं. हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान घरेलू कामों को लेकर समाज में फैली रूढ़िवादी सोच पर कड़ा प्रहार किया है.
प्रियंका का मानना है कि घर की साफ-सफाई करना या खाना बनाना किसी एक लिंग (महिला) की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर वयस्क इंसान के लिए एक बुनियादी जीवन कौशल है.
उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि लंबे समय से समाज में यह धारणा बनी हुई है कि घर संभालना सिर्फ महिलाओं का काम है और पुरुष इन सब चीजों से दूर रह सकते हैं. इस मानसिकता को सिरे से खारिज करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि काम को कभी भी जेंडर से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोग अक्सर अपने आलस्य को छुपाने के लिए इसे जेंडर का नाम दे देते हैं, जबकि यह एक वयस्क इंसान की सामान्य जिम्मेदारी है.
यह पहली बार नहीं है जब प्रियंका ने महिला सशक्तिकरण पर बात की है. इससे पहले भी वह 'मीटू' (#MeToo) आंदोलन पर खुलकर बोल चुकी हैं. उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न पर दर्द साझा करते हुए कहा था कि समाज में यह एक कड़वी सच्चाई बन चुका है, लेकिन अब महिलाएं बिना डरे इस पर आवाज उठा रही हैं, जो बेहद सराहनीय है.
प्रियंका ने फिल्मों में महिला-केंद्रित किरदारों को लेकर होने वाले मानसिक दबाव पर भी बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि फीमेल-ओरिएंटेड फिल्मों की संख्या पहले से ही काफी कम है.
ऐसे में अगर कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं करती, तो एक महिला कलाकार के रूप में उन पर बहुत बड़ा दबाव आ जाता है. उन्हें डर लगा रहता है कि उनकी एक विफलता कहीं दूसरी महिला कलाकारों के अवसरों को कम न कर दे, क्योंकि इंडस्ट्री में महिलाओं को खुद को साबित करने के मौके वैसे भी बहुत कम मिलते हैं.