खरसिया के प्राइवेट स्कूल की मान्यता रद्द करने की तैयारी
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और नियमों को ताक पर रखने के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. खरसिया क्षेत्र के ग्राम बाम्हनपाली में संचालित श्री चैतन्य टेक्नो इंग्लिश मीडियम स्कूल में जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं.
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इन गड़बड़ियों को बेहद गंभीरता से लेते हुए स्कूल की मान्यता समाप्त करने की सिफारिश उच्च अधिकारियों से की है. इससे पहले स्कूल प्रबंधन को एक कारण बताओ नोटिस भी थमाया गया था, लेकिन उनकी तरफ से तय समय सीमा के भीतर कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया.
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) की टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया. जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यू-डाइस प्लस पोर्टल में दर्ज आंकड़ों को लेकर सामने आई.
स्कूल के रिकॉर्ड के मुताबिक कक्षा 9वीं और 10वीं में केवल 10-10 विद्यार्थी ही पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि सरकारी पोर्टल पर क्रमशः 66 और 33 छात्रों की फर्जी एंट्री दिखाई गई थी. आरोप है कि प्रबंधन ने दूसरे स्कूलों के बच्चों के नाम अवैध रूप से अपने पोर्टल पर दर्ज कर उनकी पेन (PEN) और अपार (APAAR) आईडी तक तैयार कर ली थी.
इसके अलावा, स्कूल पर गरीब और आरक्षित वर्ग के बच्चों के हक पर डाका डालने का भी आरोप है. परिसर में पढ़ाई कर रहे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लगभग 230 पात्र छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति योजना का लाभ ही नहीं दिया गया.
प्रबंधन ने किसी भी छात्र की स्कॉलरशिप स्वीकृत कराने की जहमत नहीं उठाई, जिससे ये बच्चे अपने अधिकारों से वंचित रह गए.
प्रशासनिक जांच में यह भी पाया गया कि यह संस्थान शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम और सरकारी गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाकर पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त था.
स्कूल परिसर के भीतर ही सीधे कॉपियां, यूनिफॉर्म और अपने खुद के प्रकाशन की किताबें बेची जा रही थीं, जिन पर स्कूल का नाम छपा हुआ था. हद तो तब हो गई जब 'इनफिनिटी' नामक एक मोबाइल ऐप के नाम पर हर अभिभावक से किताबों के साथ 1300 से 2000 रुपये तक की अतिरिक्त अवैध वसूली की गई.
शिकायत यह भी है कि यदि कोई पालक अपने बच्चे की टीसी (Transfer Certificate) मांगता, तो स्कूल प्रबंधन उन्हें हफ्तों तक चक्कर कटवाता था.
नियमों की इस अनदेखी में यह भी शामिल है कि शासन के निर्देशानुसार अनिवार्य रूप से चलाई जाने वाली यूथ क्लब और ईको क्लब जैसी रचनात्मक व सरकारी गतिविधियां स्कूल में पूरी तरह बंद थीं.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह संस्थान लगातार सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहा था. फिलहाल, डीईओ की तरफ से मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारियों को भेज दिया गया है, जिस पर जल्द ही अंतिम मुहर लगने की संभावना है.