गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, कीचड़ भरे रास्ते में 4 किमी पैदल चली गर्भवती
गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने से कीचड़ भरे रास्ते में पैदल चली गर्भवती महिला
कांकेर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर से एक और तस्वीर सामने आई है, जिसने फिर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर किया है. साथ ही सरकार के दावों की पोल खोल दी है.
कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड के गांव पंडरीपानी से गुमड़ीपारा तक जाने वाली सड़क की हालत इतनी खराब है कि पैदल चलना भी मुश्किल है.
कीचड़ से भरे इस रास्ते पर मजबूरी में एक गर्भवती महिला को चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा. तब जाकर एम्बुलेंस मिली और उसे अस्पताल ले जाया गया.
दरअसल, बस्तर संभाग में लगातार हो रही बारिश से अंदरूनी गांवों में सड़कों की हालत बदतर हो गई है. जिस वजह से ग्रामीणों को इस तरह की हालात से हमेशा गुजरना पड़ रहा है.
वहीं लंबे समय से मांग के बावजूद ग्रामीणों को पक्की सड़क की सुविधा प्रशासन के द्वारा नहीं मिल पा रही है.
इस संबंध में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के भानुप्रतापपुर डिवीजन प्रभावी जागेश्वर ध्रुव का कहना है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत 500 जनसंख्या वाले गांवों में सड़क बना दी गई है. अब 100 जनसंख्या वाले गांवों तक सड़क बनाई जा रही है. परतापुर के आश्रित ग्राम पंडरीपानी में आबादी 100 से कम होने के चलते सड़क नहीं बन पाई है.
मामला कोयलीबेड़ा विकासखंड का है. मंगलवार को पंडरीपानी निवासी 9 महीने की गर्भवती सुनीता कोमरा को अचानक दर्द उठा.
परिजनों ने महिला को नजदीकी अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस को फोन कर बुलाया.
बदहाल सड़क की वजह से एम्बुलेंस महिला के घर तक पहुंच नहीं पाई और 4 किमी दूर ही खड़ी हो गई.
कोई दूसरा साधन नहीं होने से महिला को मजबूरी में इसी कीचड़ भरे सड़क पर पैदल चलना पड़ा.
महिला के साथ पति और परिवार की चार महिलाएं भी पैदल चलीं.
परतापुर पहुंचने के बाद एंबुलेंस मिली, जिसके जरिए महिला को पखांजूर सिविल अस्पताल ले जाया गया. जहां महिला का इलाज चल रहा है. अभी उसकी डिलीवरी नहीं हुई है.