कवयित्री पूनम वासम को शमशादी ख़ानम स्मृति कविता सम्मान
रायपुर | संवाददाता : हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. पूनम वासम को प्रथम शमशादी ख़ानम स्मृति कविता सम्मान से सम्मानित किया गया है. इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 21 हजार रुपये की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र तथा शाल-श्रीफल प्रदान किया गया.
यह सम्मान 20–21 दिसंबर को उत्तरप्रदेश के बांदा स्थित हार्पर क्लब में आयोजित बांदा साहित्य-कला सहकार महोत्सव 2025 के दौरान प्रदान किया गया. कार्यक्रम का आयोजन प्रतीक फाउंडेशन, देवेंद्रनाथ खरे स्मृति शोध संस्थान, रहमानी परिवार तथा नृत्यकला गृह, बांदा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया.
छत्तीसगढ़ के बीजापुर की रहने वाली डॉ. पूनम वासम की कविताएं आदिवासी जीवन, संघर्ष, प्रकृति और लोक-संस्कृति को गहराई से उकेरती हैं.
लोक में रची-पगी अपनी विशिष्ट भाषा, शिल्प और संवेदना के कारण उन्होंने हिंदी साहित्य में एक अलग पहचान बनाई है. उनकी रचनाओं में जहां बस्तर की लोक-जीवन की झलक मिलती है, वहीं बस्तर का दर्द और संघर्ष भी तीव्रता से उभरकर सामने आता है.
कविता संग्रह बेहद चर्चित
पिछले कई वर्षों से डॉ. पूनम वासम की कविताएं देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं. लोक को केंद्र में रखकर रची गई उनकी कविताओं में बस्तर का पूरा भूगोल जीवंत रूप में उपस्थित रहता है.
उनका पहला कविता संग्रह ‘मछलिया गाएंगी एक दिन पंडुम गीत’वर्ष 2021 में प्रकाशित हुआ था, जिसे हिंदी समाज ने हाथों-हाथ लिया. उनका दूसरा कविता संग्रह शीघ्र प्रकाशित होने वाला है.
डॉ. पूनम वासम की कविताएं संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय (महाराष्ट्र) के पाठ्यक्रम में शामिल हैं. इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली के बीए. (ऑनर्स) हिंदी पाठ्यक्रम में भी उनकी कविताएं पढ़ाई जा रही हैं.
उनकी रचनाओं पर शोधार्थियों द्वारा शोध एवं लघु शोध कार्य किए जा रहे हैं.साथ ही कविताओं का कई भाषाओं में अनुवाद भी जारी है.
मिले कई पुरस्कार और सम्मान
डॉ. पूनम वासम को कई पुरस्कार और सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है.उन्हें पुनर्नवा पुरस्कार 2020, अमर उजाला शब्द सम्मान 2022 और कलिंग लिटरेचर फेस्टिवल बुक अवॉर्ड (2022) से सम्मानित किया जा चुका है.
1 जनवरी 1980 को जगदलपुर में जन्मी डॉ. पूनम वासम की स्कूली शिक्षा महारानी लक्ष्मीबाई हायर सेकेंडरी स्कूल, जगदलपुर से हुई. उन्होंने समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के समाजशास्त्रीय पहलुओं पर पीएचडी की है.
वर्तमान में वे बीजापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं.