इंद्रावती नदी पर 'फुंदरी पुल' बना अबूझमाड़ के लिए गेम चेंजर
बीजापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर में दशकों से माओवादियों का 'सुरक्षा कवच' रही इंद्रावती नदी की बाधा अब समाप्त हो गई है. बीजापुर जिले में निर्माणाधीन 648 मीटर लंबे फुंदरी पुल का काम अंतिम चरण में है, जिसने माओवादियों के तथाकथित 'लिबरेटेड जोन' यानी अबूझमाड़ के सुरक्षित ठिकानों को राज्य की मुख्यधारा से जोड़ दिया है.
जिला प्रशासन के अनुसार, मानसून की शुरुआत से पहले यह पुल आम जनता के लिए पूरी तरह खुल जाएगा.
सैन्य रणनीतिकार और स्थानीय अधिकारी इस पुल को नक्सल विरोधी अभियान में एक 'ऐतिहासिक मोड़' मान रहे हैं. कभी इस दुर्गम इलाके में माओवादियों की सबसे घातक टुकड़ियों और सैकड़ों सशस्त्र लड़ाकों का कब्जा था, लेकिन पुल के निर्माण ने उनकी सबसे बड़ी ताकत 'अलगाव' को खत्म कर दिया है. अब इस क्षेत्र में सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी नगण्य रह गई है.
इस पुल का निर्माण किसी युद्ध से कम नहीं था. साल 2018 में कार्य आदेश जारी होने के बाद से ही नक्सलियों ने इसे अपनी सत्ता के लिए अस्तित्व का खतरा माना और आधा दर्जन से अधिक बड़े हमले किए. सुरक्षा बलों के कैंपों की सुरक्षा में 'किलेबंदी रणनीति' के तहत इस पुल को तैयार किया गया है.
जहां पहले जिला मुख्यालय से अबूझमाड़ पहुंचने के लिए 210 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था या जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करनी पड़ती थी, वहीं अब यह दूरी आधी से भी कम रह जाएगी. यह पुल न केवल सुरक्षा बलों की पहुंच आसान करेगा, बल्कि अबुझमाड़ के सुदूर गांवों जैसे बनगोली, बेलनार और मार्रामेटा तक शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की रोशनी पहुंचाएगा.