पंकज बेक कस्टोडियल डेथ, नाकामी पर CBI संभालेगी केस- कोर्ट
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से जुड़े बेहद संवेदनशील और बहुचर्चित कस्टोडियल डेथ मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश एम. राज की कोर्ट ने क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक को सख्त निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच कराई जाए और इसकी कमान सीधे तौर पर जिले के पुलिस अधीक्षक को सौंपी जाए.
अदालत ने पुलिस महकमे को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ किया है कि यदि स्थानीय पुलिस इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने में विफल रहती है, तो पूरे प्रकरण को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के सुपुर्द कर दिया जाएगा.
दरअसल, यह खौफनाक घटना 21 जुलाई 2019 की रात की है, जब सिटी कोतवाली पुलिस ने महज चोरी के संदेह में एक आदिवासी युवक पंकज बेक को अपनी गिरफ्त में लिया था. पीड़ित परिवार के वकील के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पंकज के शरीर पर 10 जगहों पर बेहद गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे, जो बर्बरता की गवाही दे रहे थे.
आरोप है कि पुलिस हिरासत के दौरान युवक को ऐसी अमानवीय यातनाएं दी गईं कि उसने दम तोड़ दिया.
इस घटना के मुख्य चश्मदीद गवाह इमरान ने चौंकाने वाला खुलासा किया था कि उस रात पुलिस ने उसे और पंकज दोनों के पैर बांधकर उन्हें उल्टा लटका दिया था और रात भर बेहरमी से पीटा था. इमरान के मुताबिक, कुछ देर बाद पास के कमरे से पंकज की चीखें आना बंद हो गईं और अगली सुबह उसकी लाश एक स्थानीय अस्पताल के विंडो कूलर में संदिग्ध परिस्थितियों में बैठी हुई हालत में बरामद हुई.
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी विनीत दुबे, सब-इंस्पेक्टर मनीष यादव, एएसआई प्रियेश जॉन और अन्य आरक्षकों ने अपने रसूख का दुरुपयोग करते हुए मामले को रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की.
आरोपियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज कंधे और पैर की गंभीर चोटों के साक्ष्यों को फर्जी तरीके से बदलवा दिया और न्यायालय को गुमराह करते हुए केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी. हालांकि, अब अदालत के कड़े रुख के बाद इस पूरे मामले की परतें दोबारा खुलने की उम्मीद जाग गई है.