9 जुलाई को देशव्यापी हड़ताल
रायपुर । संवाददाता: श्रम संहिता रद्द करने सहित 23 मांगों को लेकर 20 करोड़ मजदूर-किसान 9 जुलाई को हड़ताल पर रहेंगे. देशभर के ट्रेड यूनियनों ने 9 जुलाई 2025 को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है, जिसमें 20 करोड़ से अधिक मजदूर, किसान और कर्मचारी शामिल होंगे. यह हड़ताल केंद्र सरकार के चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को रद्द करने और 23 सूत्रीय मांगों को लेकर की जा रही है. छत्तीसगढ़ में संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र के नेतृत्व में इस आंदोलन को सफल बनाने की तैयारी चल रही है.
धर्मराज महापात्र ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्र सरकार ने कोरोना काल में 44 श्रम कानूनों में से 29 को खत्म कर चार नये श्रम संहिताएं लागू कीं, जिससे मजदूरों के अधिकार छिन गये. यूनियन बनाना और हड़ताल करना मुश्किल कर दिया गया है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 के तहत हड़ताल को अपराध घोषित करने का प्रावधान है. स्थायी नौकरियों की जगह ठेका और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिये गये हैं, और न्यूनतम वेतन व सामाजिक सुरक्षा के अधिकार भी कमजोर किये गये हैं.
महापात्र ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली, बैंक, रेलवे, रक्षा जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण कर रही है और संपत्ति को अडानी, अंबानी जैसे उद्योगपतियों को सौंप रही है. मनरेगा, आंगनबाड़ी, और मिड-डे मील के बजट में कटौती से मजदूरों और कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है. स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से भारी राशि वसूली जा रही है.
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-
श्रम संहिताएं रद्द करना
₹26,000 न्यूनतम मजदूरी और हर 5 साल में संशोधन
निजीकरण और ठेकाकरण पर रोक
8 घंटे कार्यदिवस का कड़ाई से पालन
मनरेगा में 200 दिन काम और उचित मजदूरी
पुरानी पेंशन योजना बहाल करना
किसानों के लिए C2+50% फॉर्मूले पर MSP की गारंटी
महापात्र ने छत्तीसगढ़ के श्रमिकों और नागरिकों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की. 8 जुलाई को मशाल जुलूस, कैंडल मार्च और मोटरसाइकिल रैली आयोजित की जाएगी. 9 जुलाई को सभी से हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया गया है.