नारायणपुर: 'घर वापसी' के बाद गांव में मिली दोबारा जगह
नारायणपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के खड़कागांव में धर्म परिवर्तन को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है. गांव के लोगों ने कथित तौर पर धर्म बदलने के कारण एक आदिवासी परिवार को अस्थाई रूप से उनके घर और बस्ती से बाहर निकाल दिया था. हालांकि, प्रशासन की समझाइश और परिवार द्वारा दोबारा अपने मूल सनातन आदिवासी रीति-रिवाजों को अपनाने की सहमति के बाद उन्हें गांव में वापस रहने की अनुमति दे दी गई है.
मिली जानकारी के अनुसार, गांव के रहने वाले मंटू दुग्गा ने कुछ समय पहले ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि उनके बेटे मोहन दुग्गा कबीर पंथ का पालन कर रहे थे. ग्रामीणों का आरोप था कि परिवार ने लंबे समय से गांव के पारंपरिक आदिवासी धार्मिक आयोजनों और प्रथाओं में हिस्सा लेना बंद कर दिया था.
ग्राम सभा ने इस विषय पर कई बार चर्चा की और अंततः परिवार को गांव से बाहर निकालने का फैसला किया. ग्रामीणों ने उनके घर से सामान हटा दिया था, हालांकि मकान को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया.
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारी तुरंत खड़कागांव पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के साथ लंबी बैठक की.
नारायणपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील नायक ने बताया कि समझाइश के बाद दुग्गा परिवार अपने मूल आदिवासी धर्म में लौटने के लिए तैयार हो गया. इसके बाद पूरे विधि-विधान और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ परिवार की 'घर वापसी' कराई गई. ग्रामीणों ने भी परिवार को गले लगाया और अब गांव में स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है.