खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम संघीय ढांचे पर हमला- भूपेश बघेल
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार द्वारा पारित 'खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026' का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस महत्वपूर्ण कानून को संसद में बिना किसी सार्थक चर्चा के पारित कराया गया, जो देश के संघीय ढांचे पर सीधा हमला है.
खनिजों पर राज्यों के वित्तीय अधिकारों की कटौती का आरोप
भूपेश बघेल के अनुसार, इस नए संशोधन के प्रभावी होने के बाद राज्य सरकारें अपने क्षेत्र से निकलने वाले खनिजों पर कोई उपकर (सेस) नहीं लगा सकेंगी. उन्होंने इसे राज्यों के वित्तीय अधिकारों पर बड़ा कुठाराघात करार दिया. पूर्व सीएम ने कहा कि यह कानून वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ द्वारा दिए गए उस ऐतिहासिक फैसले के प्रभाव को निष्प्रभावी करने की साजिश है, जिसमें राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर और सेस लगाने का संवैधानिक अधिकार दिया गया था.
उन्होंने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ जैसे समृद्ध खनिज संपदा वाले राज्य जहां से कोयला, आयरन ओर, बॉक्साइट, टिन और जिंक भारी मात्रा में निकलता है के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. केरल, झारखंड, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों द्वारा इस कानून के खिलाफ आवाज उठाने का जिक्र करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ की साय सरकार की चुप्पी और "डबल इंजन सरकार" के फायदों पर सवाल खड़े किए.
जर्जर स्कूल भवनों को लेकर 'जेन अल्फा' का आंदोलन
राज्य के आंतरिक मुद्दों को रेखांकित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने बताया कि धमतरी (बारना), धमधा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सक्ती, सारंगढ़ और बिलाईगढ़ में स्कूली बच्चे ('जेन अल्फा') अपनी सुरक्षा और भवनों की मरम्मत के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं.
कांग्रेस शासनकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना" के तहत प्रदेश के लगभग 30 हजार स्कूलों के रखरखाव व निर्माण के लिए 1,807.68 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 1,191 करोड़ रुपये खर्च भी हुए थे. लेकिन वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही इस योजना को बंद कर दिया और शेष बजट निरस्त कर दिया. इसके कारण आज स्कूलों की छतें टपक रही हैं, शौचालय खराब हैं और 1,463 स्कूल बंद होने के बाद बचे हुए भवनों में बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई हो रही है.
पीएम आवास योजना के आंकड़ों पर सरकार में विरोधाभास
प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यान्वयन पर बघेल ने राज्य सरकार को घेरते हुए आंकड़ों की बाजीगरी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 9 जून 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 18.5 लाख पीएम आवास पूरे होने की बात कही थी. वहीं, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा से मिली जानकारी के हवाले से बयान दिया कि राज्य में केवल 9.81 लाख आवास ही पूरे हुए हैं.
लोकसभा के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 वर्षों में 15.45 लाख आवास का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष 13.55 लाख आवास स्वीकृत हुए थे. पूर्व सीएम ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल किया कि उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से झूठ बोला या फिर लोकसभा में दी गई जानकारी गलत है?
'वंदे मातरम' पर विवाद और पीएम-गृहमंत्री को चुनौती
'वंदे मातरम' को लेकर जारी राजनीतिक बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान कांग्रेसियों ने वंदे मातरम गाते हुए लाठियां और गोलियां खाई थीं, जबकि भाजपा के वैचारिक पूर्वज (आरएसएस और हिंदू महासभा) इस आंदोलन से दूर थे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में जब पहली बार यह गीत गाया गया, तब से इसके शुरुआती दो पद ही गाए जाते रहे हैं, जिनमें मातृभूमि की वंदना है. 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने पहले दो अंतरे गाने का निर्णय लिया था, जिसे 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी थी.
पूर्व सीएम ने भाजपा पर इसका राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और चुनौती दी कि यदि उनके किसी पूर्वज ने वंदे मातरम गाते हुए लाठी खाई हो तो वह साबित करें. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा 'वंदे मातरम' गाकर दिखाने की खुली चुनौती दी.