बस्तर में बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में आई तेजी
रायपुर । संवाददाता: केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 को "नक्सल मुक्त भारत" की आधिकारिक घोषणा किए जाने के बाद, छत्तीसगढ़ के पूर्व उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में बारूदी सुरंगों को हटाने (डीमाइनिंग) के अभियान में अभूतपूर्व तेजी आई है. सुरक्षा बल अब उन सुदूर और जोखिम भरे इलाकों को सुरक्षित करने में जुटे हैं, जहाँ कभी सुरक्षा घेरे के बिना जाना नामुमकिन था. इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के लिए सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन को पूरी तरह बहाल करना है.
इस संयुक्त अभियान में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और छत्तीसगढ़ पुलिस का डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. सुरक्षा बलों का मुख्य ध्यान उन राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय मार्गों और आंतरिक संपर्क सड़कों पर है, जहाँ नक्सली गतिविधियों के दौरान भारी मात्रा में इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (आईईडी) प्लांट किए गए थे.
सीआरपीएफ की 80वीं वाहिनी के कमांडेंट जितेंद्र कुमार के अनुसार, इस अभियान में पूर्व नक्सलियों से प्राप्त खुफिया जानकारी और इनपुट्स बेहद मददगार साबित हो रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी बटालियनें इस समय सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के प्राथमिक मिशन पर काम कर रही हैं.
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सुरक्षा बल अत्याधुनिक तकनीकों और पारंपरिक तरीकों के अनूठे मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि आईईडी का पता लगाने के लिए ट्रैक्टरों, कॉम्पैक्ट वायर डिटेक्टरों और आधुनिक उपकरणों से लैस के9 डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है. किसी भी क्षेत्र में जमीनी कार्रवाई शुरू करने से पहले ड्रोन कैमरों के जरिए हवाई सर्वेक्षण किया जाता है, ताकि संभावित खतरों की सटीक पहचान की जा सके और सुरक्षा बलों के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके.
सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट मक्सूद आलम ने बताया कि यह अभियान किसी एक जिले तक सीमित न होकर अंतर-बटालियन समन्वय के साथ बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है. इसका सीधा असर दूरदराज के गांवों को जोड़ने वाले मार्गों पर पड़ेगा, जिससे वहां विकास कार्य तेज हो सकेंगे.
स्थानीय समुदायों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए इस अभियान को एक बड़े विश्वास-बिल्डिंग मेजर के रूप में देखा जा रहा है. सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन रास्तों के पूरी तरह सुरक्षित होने से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और पुनर्वास के कार्यों को नई गति मिलेगी, जिससे वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में प्रगति का एक नया अध्याय शुरू होगा.