माओवादी: एक साल में 21 से घटकर 5 रह गए केंद्रीय कमेटी सदस्य
रायपुर । संवाददाता: भारत में नक्सलियों के खिलाफ जारी जंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है. सुरक्षा बलों के निरंतर प्रहार से प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की कमर पूरी तरह टूट चुकी है. छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, माओवादियों की सबसे शक्तिशाली और शीर्ष निर्णायक इकाई 'केंद्रीय कमेटी' का वजूद लगभग खत्म होने की कगार पर है.
साल 2025 की शुरुआत में जिस कमेटी में 21 सदस्य सक्रिय थे, वहां अब केवल 5 सदस्य ही शेष बचे हैं.
नक्सली आंदोलन को ताजा और सबसे बड़ा झटका 25 दिसंबर को लगा, जब सुरक्षा बलों ने ओडिशा और आसपास के इलाकों में आतंकी अभियानों का नेतृत्व करने वाले केंद्रीय कमेटी सदस्य गणेश उइके को एक मुठभेड़ में मार गिराया. उइके पर 1.10 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम था और वह इस साल मारा जाने वाला 11वां सीसी सदस्य है. इससे पहले सुरक्षा बलों ने बसवराजू, माडवी हिडमा, कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कादरी सत्यनारायण रेड्डी जैसे खूंखार और दशकों से वांछित नक्सलियों को विभिन्न मुठभेड़ों में ढेर किया है.
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने इस बड़ी सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने उन सभी इलाकों (वैक्यूम एरिया) में अपनी पहुंच बना ली है, जहां पहले नक्सलियों का दबदबा था.
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में कुल 270 माओवादी मारे गए, जबकि 1,225 से अधिक कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा को चुना. इनके अलावा 680 से अधिक नक्सलियों को गिरफ्तार भी किया गया है. सुजाता और मल्लुजुला वेणुगोपाल राव जैसे बड़े नामों का आत्मसमर्पण संगठन के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ी हार साबित हुआ है.
वर्तमान में जो 5 केंद्रीय कमेटी सदस्य बचे हैं, उनमें संगठन का पूर्व महासचिव गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) भी शामिल है, जिसकी उम्र 70 वर्ष से अधिक बताई जा रही है. बचे हुए अन्य सदस्य भी 60 वर्ष से अधिक आयु के हैं और गंभीर बीमारियों या वृद्धावस्था के कारण जंगलों में लंबे समय तक टिकने में असमर्थ हैं.
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि दक्षिण बस्तर में अब केवल 100 से 150 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं. केंद्र सरकार द्वारा माओवाद को समाप्त करने के लिए निर्धारित 31 मार्च 2026 की समयसीमा से पहले ही सुरक्षा बलों की यह बढ़त नक्सलियों के पूर्ण सफाए का संकेत दे रही है.