गरियाबंद में तेंदुए का 3 दिनों में 3 बच्चों पर हमला
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सीमावर्ती गांवों में इन दिनों तेंदुए के आतंक से दहशत का माहौल है. पिछले तीन दिनों के भीतर तेंदुए ने लगातार तीन मासूम बच्चों को अपना निशाना बनाया है. इस सिलसिलेवार हमले से राष्ट्रीय राजमार्ग से महज 6 किलोमीटर दूर रहने वाले ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर का माहौल है.
तेंदुए के हमले की ताजा घटना शनिवार को पंडरा गांव में सामने आई. यहाँ पांच साल की मासूम बच्ची खोमिका बाई कमार अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी अचानक झाड़ियों से निकलकर तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया और उसे घसीटने की कोशिश करने लगा.
बच्ची की चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर शोर मचाते हुए मौके की तरफ दौड़े. भारी भीड़ को अपनी ओर आता देख तेंदुआ बच्ची को छोड़कर जंगल की तरफ भाग निकला. तेंदुए के पंजों के हमले से घायल बच्ची को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इससे पहले, शुक्रवार को पंडरा से करीब दो किलोमीटर दूर कोडोबत्तर गांव में भी सात साल की एक बच्ची पर तेंदुए ने ऐसा ही जानलेवा हमला किया था. ग्रामीणों की सूझबूझ से बच्ची को तेंदुए के चंगुल से तो छुड़ा लिया गया, लेकिन गंभीर चोटें आने के कारण उसे इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है.
वहीं, 22 मई को कोडोबत्तर के ही चट्टानपारा में शाम के वक्त घर लौट रहे 10 साल के बच्चे धनेश कुमार कमार पर तेंदुए ने घात लगाकर हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था.
बैक-टू-बैक हुए इन हमलों से वन विभाग के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में तेंदुए की लगातार आवाजाही और शुरुआती हमलों के बाद भी अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित इलाकों में तुरंत पिंजरा लगाने, गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है ताकि किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके.
इलाके में लगातार हो रहे हमलों के कारण लोग अब सूर्यास्त के बाद घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं. माता-पिता ने भी बच्चों को शाम के समय अकेले खेलने भेजने पर रोक लगा दी है. हालांकि, वन विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है कि तीनों हमलों के पीछे एक ही तेंदुआ है, लेकिन प्रभावित गांवों में निगरानी और सर्चिंग तेज कर दी गई है. Symbolic Photo.