ट्रेन में लैपटॉप चोरी: NCDRC का फैसला, मुआवजे की दोबारा गणना के आदेश
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने रेलवे यात्रा के दौरान चोरी हुए एक सरकारी लैपटॉप के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुआवजे की राशि की नए सिरे से गणना करने का कड़ा आदेश दिया है. जस्टिस ए.पी. साही (अध्यक्ष) और सदस्य भरतकुमार पंड्या की पीठ ने सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारी कमलेश कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि निचली उपभोक्ता अदालतों ने मुआवजे के निर्धारण में "गंभीर अनियमितता" बरती और एक "त्रुटिपूर्ण दृष्टिकोण" अपनाया था.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ड्यूटी के दौरान ट्रेन यात्रा करते समय कमलेश कुमार का आधिकारिक लैपटॉप चोरी हो गया था, जिसके बदले उनके विभाग ने दंड स्वरूप उनके वेतन से कुल 1,59,261 रुपये की वसूली की थी.
जिला उपभोक्ता फोरम ने शुरुआत में रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 50,000 रुपये मुआवजे और ब्याज का आदेश दिया था, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने साल 2015 में एक विभागीय दस्तावेज की गलत व्याख्या करते हुए इस राशि को और घटाकर महज 28,406 रुपये कर दिया था.
राज्य आयोग ने यह मान लिया था कि ₹1.98 लाख की राशि सात लैपटॉप की कीमत थी, जिसे NCDRC ने पूरी तरह से आधारहीन और गलत पाया.
राष्ट्रीय आयोग ने अपने हालिया आदेश में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिस दस्तावेज के आधार पर मुआवजे में कटौती की गई, वह कोई आधिकारिक बिल या इनवॉइस नहीं बल्कि केवल एक आंतरिक विभागीय पत्राचार था.
आयोग ने रेखांकित किया कि जब शिकायतकर्ता के वेतन से वास्तविक रूप में 1,59,261 रुपये काटे जा चुके हैं, तो मुआवजे का आधार वही वास्तविक नुकसान होना चाहिए. इसके साथ ही, NCDRC ने रेलवे की उस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें इस शिकायत की 'मेनटेनेबिलिटी' पर सवाल उठाए गए थे.
आयोग ने कहा कि चूंकि रेलवे ने पूर्व में इस मुद्दे पर कोई चुनौती नहीं दी थी, इसलिए अब यह माना जाएगा कि उन्होंने नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है.
अब इस 12 साल लंबी कानूनी लड़ाई को तार्किक अंत तक पहुँचाने के लिए मामले को वापस छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC) भेज दिया गया है.
आयोग ने निर्देश दिया है कि 6 मई 2026 को दोनों पक्ष रायपुर में पेश हों, जहाँ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुआवजे की नई और सटीक राशि निर्धारित की जाएगी. तब तक के लिए, रेलवे को अंतरिम राहत के रूप में पुरानी निर्धारित राशि और मानसिक प्रताड़ना के लिए 5,000 रुपये छह सप्ताह के भीतर चुकाने होंगे.