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कवासी लखमा की 30 जून तक बढ़ी न्यायिक रिमांड

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Hupendra Sharma

20 जून 2025, 01:25 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

कवासी लखमा
कवासी लखमा

रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कवासी लखमा को शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ईओडब्ल्यू की विशेष कोर्ट में पेश किया गया. जहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने लखमा की न्यायिक रिमांड 30 जून तक बढा दी.


बताया जा रहा है कि 30 जून को एजेंसी लखमा के खिलाफ़ पूरकचालान पेश करेगी.

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ईडी ने पिछले सप्ताह ही लखमा की 6.50 करोड़ की संपत्ति अटैच की थी. वहीं एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कवसी लखमा से सेंट्रल जेल में मुलाकात की थी.


उन्होंने सरकार पर कवासी लखमा का उपचार नहीं कराने का आरोप लगाया है.


यह सोची समझी साजिश- भूपेश

भूपेश बघेल ने कहा था कि कवासी लखमा की तबीयत खराब है. उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं की सख्त जरूरत है. इसके बावजूद उनका उपचार नहीं कराया जा रहा है. जबकि कोर्ट ने उपचार के आदेश दिए हैं. 


उन्होंने यह भी कहा था कि पूर्व मंत्री लखमा हार्ट के मरीज हैं, समय पर उपचार नहीं मिलने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. लेकिन पुलिस बल की कमी का हवाला देकर उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया जा रहा है.


भूपेश बघेल ने कहा था कि सरकार लखमा के साथ व्यक्तिगत दुश्मनी की तरह व्यवहार कर रही है. समय बदलते देर नहीं लगती. उन्होंने कहा था कि एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार किया है. मामला कोर्ट में चल रहा है. पूछताछ में सहयोग किया जा रहा है. उसके बाद भी जमानत नहीं दी जा रही है. यह सोची समझी साजिश है.


क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी जांच कर रही है. ईडी ने एसीबी में रिपोर्ट दर्ज कराई है.


दर्ज एफआईआर में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. ईडी के चालान में इस मामले में अब तक 21 लोगों को आरोपी बनाया गया है. 


शराब घोटाला मामले में ईडी ने 28 दिसंबर 2024 को कवासी लखमा के आवास व अन्य ठिकानों पर छापा मारकर महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे. जिनमें घोटाले से हुई कमाई के सबूत थे.

उसके बाद लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया. कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में हैं.


कवासी लखमा पर आरोप है कि वह शराब घोटाले में सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे. उन्हीं के निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था. इनसे अलावा शराब नीति बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका थी.


ईडी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया.


आरोप है कि शराब घोटाले में कमीशन के तौर पर लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे.


ईडी का कहना है कि 3 साल तक शराब घोटाला चला. तीन साल के 36 महीने में लखमा को कुल 72 करोड़ रुपए मिले.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP