जशपुर: पटवारियों ने निलंबन के खौफ को ठुकराकर शहर में निकाली आक्रोश रैली
प्रशासनिक कार्रवाई की परवाह न करते हुए जशपुर में पटवारियों की हड़ताल 21वें दिन भी जारी रही. रणजीता स्टेडियम से कलेक्टर कार्यालय तक काले कपड़े पहनकर पहुंचे पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी चार सूत्रीय मांगों पर त्वरित निर्णय की गुहार लगाई.
जशपुर । संवाददाता: प्रशासनिक नोटिस और निलंबन की कार्रवाइयों के बावजूद जशपुरनगर में अपनी चार सूत्रीय मांगों के समर्थन में पटवारियों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को हड़ताल के 21वें दिन संघ के सदस्यों ने विरोध का नया तरीका अपनाते हुए काले कपड़ों में एक विशाल रैली निकाली.
यह रैली रणजीता स्टेडियम से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों—जय स्तंभ चौक, महाराजा चौक, बजरंगबली चौक, पुरानी टोली और सिटी कोतवाली—से गुजरते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया. पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें स्वीकार नहीं की जातीं, यह प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा.
रणजीता स्टेडियम चौक पर आयोजित एक पत्रकारवार्ता के दौरान जिला अध्यक्ष विनय श्रीवास्तव ने अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि पीवी एप की तकनीकी खामियों की ओर बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकाला गया, बल्कि उल्टे कार्रवाई का भय दिखाकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया.
पदोन्नति के मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कई पटवारी एक ही पद पर आकर उसी से सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जबकि चतुर्थ श्रेणी के नियमित कर्मचारी भी अपने सेवाकाल में पदोन्नत हो जाते हैं.
इसके साथ ही रायपुर में वार्ता के दौरान आए संदेश पर भी संघ ने रोष जताया, जिसमें रास्ते में ही वाट्सएप कॉल के जरिए पहले हड़ताल समाप्त करने की शर्त रखी गई थी, जिससे बातचीत का रास्ता बंद हो गया.
संघ के पदाधिकारी संतोष स्वर्णकार ने वेतन विसंगति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में समिति बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसके चलते एक ही बैच के पटवारियों के मानदेय में 5 से 7 हजार रुपए का भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह अधिकारियों को भी स्पष्ट नहीं है.
संघ के नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते पीवी एप और डीसीएस एप से जुड़ी समस्याओं का निराकरण कर लिया जाता, तो ऐसी नौबत नहीं आती. वर्तमान में तमाम दबावों और प्रशासनिक कार्रवाइयों के बावजूद संगठन पूरी तरह से एकजुट है और अपनी मांगों को मनवाने के लिए पूरी मजबूती के साथ डटा हुआ है.