इस्तीफे से खाली हुए पद को वेटिंग लिस्ट से भरने के विज्ञापन शर्त को हाईकोर्ट ने माना बाध्यकारी
इस्तीफे से खाली हुए पद को वेटिंग लिस्ट से भरने के विज्ञापन शर्त को हाईकोर्ट ने माना बाध्यकारी, जिला अदालत की अपील खारिज.
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सहायक ग्रेड-3 के पद पर प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के उम्मीदवार की नियुक्ति को सही ठहराया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन सूची जारी होने के एक वर्ष के भीतर चयनित उम्मीदवार के त्यागपत्र देने से खाली हुए पद को वेटिंग लिस्ट से ही भरा जाना अनिवार्य है, क्योंकि भर्ती प्राधिकरण अपने ही विज्ञापन की शर्तों से बंधा हुआ है.
मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और न्यायाधीश संतोष शर्मा की खंडपीठ ने राजनांदगांव के जिला न्यायाधीश द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए 30 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया.
अदालत ने कहा कि जब नियोक्ता ने विज्ञापन में खुद यह प्रावधान शामिल किया था कि एक साल के भीतर त्यागपत्र, बर्खास्तगी, मृत्यु या अन्य किसी कारण से खाली होने वाले पद को वेटिंग लिस्ट से भरा जाएगा, तो इस शर्त का पालन करना अनिवार्य है. ऐसे में वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थी के दावे को खारिज करना मनमाना और अनुचित है.
यह मामला जून 2023 में राजनांदगांव जिला न्यायाधीश द्वारा सहायक ग्रेड-3 के नौ पदों समेत अन्य भर्तियों के लिए जारी विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें दो पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थे. इस भर्ती प्रक्रिया में चंद्रशेखर कंवर एसटी वर्ग की वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहे. 17 सितंबर 2023 को अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद चयनित एसटी उम्मीदवार ने एक साल के भीतर ही इस्तीफा दे दिया.
इसके बाद कंवर ने भर्ती विज्ञापन के नियमों का हवाला देते हुए नियुक्ति के लिए राजनांदगांव जिला न्यायाधीश के समक्ष आवेदन दिया. हालांकि, उनके आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि चयनित उम्मीदवार के जॉइन करने के बाद इस्तीफा देने से बनी रिक्ति को वेटिंग लिस्ट से नहीं भरा जा सकता और इसके लिए नई भर्ती करनी होगी.
इस फैसले के खिलाफ कंवर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां एकल पीठ ने अधिकारियों को बिना पिछले वेतन के छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति देने और वास्तविक नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता तय करने का निर्देश दिया था. इस आदेश को जिला न्यायाधीश ने खंडपीठ में चुनौती दी थी, जिसे अब खंडपीठ ने पूरी तरह खारिज कर दिया है.