बिना पक्ष सुने जेल में बंद CRPF इंस्पेक्टर को नौकरी से निकाला: HC ने रद्द की बर्खास्तगी
हिरासत के दौरान बिना पक्ष सुने CRPF इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए बिना पिछले वेतन के पुनर्नियुक्ति का निर्देश दिया है.
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जेल में निरुद्ध रहने के दौरान संबंधित कर्मचारी के पीछे से विभागीय कार्रवाई संचालित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है और इससे उसे अपना बचाव करने का उचित अवसर नहीं मिला.
न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने वाईके सोलोमन द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए 3 सितंबर 2018 को जारी बर्खास्तगी के आदेश और उसके बाद खारिज की गई अपील को निरस्त कर दिया.
उच्च न्यायालय ने उन्हें बिना पिछले वेतन (बैक वेजेस) के सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है, हालांकि CRPF प्रशासन को नियमानुसार नए सिरे से कानूनी कार्रवाई शुरू करने की छूट दी गई है.
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, सोलोमन को अगस्त 2016 में एक नागरिक संजय सिंह के साथ हुई कथित मारपीट और इलाज के दौरान उसकी मौत के आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया था. जब वह न्यायिक हिरासत में थे, तब CRPF अधिकारियों ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी.
जुलाई 2018 में सेंट्रल जेल, अंबिकापुर में सोलोमन को एक नोटिस देकर 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया. सोलोमन ने जेल में बंद होने के कारण असमर्थता जताते हुए रिहाई तक जांच स्थगित करने की प्रार्थना की थी.
इसके बावजूद अधिकारियों ने उनके अनुरोध को अनदेखा कर जांच जारी रखी और यह दर्ज करते हुए कि बचाव में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया, उन्हें बर्खास्त कर दिया.
उच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर ध्यान न देकर पूरी जांच उसके पीछे से पूरी की गई, जबकि प्राधिकारियों का यह कानूनी कर्तव्य था कि वे कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त और तर्कसंगत अवसर प्रदान करते.