जांजगीर: धान का दाम 3,358 रुपये करने और रबी की तैयारियों को लेकर किसानों की रैली
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में कृषक चेतना मंच ने धान खरीदी पोर्टल को अंत तक चालू रखने, 3,358 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने और रबी फसल के लिए खाद-पानी के पुख्ता इंतजाम की मांग को लेकर प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा.
जांजगीर । संवाददाता: जांजगीर-चांपा में कृषक चेतना मंच ने किसानों से जुड़ी विभिन्न जमीनी समस्याओं और आगामी कृषि चक्र की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए 11 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को प्रेषित किया है. इससे पहले केरा रोड स्थित ठा. छेदीलाल बैरिस्टर भवन में कृषक प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें फसल सत्यापन से लेकर उपज के उचित मूल्य पर गहन मंथन किया गया.
मंच ने सबसे प्रमुख मांग धान के समर्थन मूल्य को लेकर रखी है. उनकी मांग है कि किसान उन्नति योजना के अंतर्गत बीते तीन वर्षों में हुई वृद्धि को समाहित करते हुए आगामी खरीदी में धान की कीमत 3,358 रुपये प्रति क्विंटल तय की जाए.
इसके साथ ही, पूर्ववर्ती सरकार की राजीव गांधी न्याय योजना की बकाया किश्त का भुगतान दीपावली पर्व से पहले करने का आग्रह किया गया है, ताकि त्यौहार के समय किसानों को वित्तीय राहत मिल सके.
प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सत्यापन व्यवस्था को सुगम बनाने पर भी जोर दिया गया है. कृषक चेतना मंच का कहना है कि आगामी धान खरीदी के लिए एग्रीस्टैक, फिजिकल वेरिफिकेशन और डीसीएस जैसी सभी औपचारिकताएं व पंजीयन 30 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं. यदि तय समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो सत्यापन की अनिवार्यता को फिलहाल स्थगित रखा जाए.
किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि धान खरीदी का पोर्टल अंतिम दिन तक खुला रहे और खड़ी फसल की जांच समय पर हो, ताकि बाद में प्रशासनिक स्तर पर किसानों पर किसी तरह का अनावश्यक दबाव न बने. साथ ही रकबा समर्पण के लिए भी कृषकों पर सख्ती न करने की बात कही गई है.
रबी फसल की पूर्व तैयारियों को लेकर ज्ञापन में पर्याप्त व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है. सिंचाई के लिए नहरों में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने और गैर-धान क्षेत्रों में वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से नहरों की सफाई कराने की मांग शामिल है.
रबी सीजन के दौरान खाद की किल्लत न हो, इसके लिए सहकारी समितियों के जरिए नकद खाद बिक्री की सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा, जिन इलाकों में रबी के दौरान धान की खेती नहीं की जाएगी, उनका समय रहते चिन्हांकन करने का सुझाव भी दिया गया है ताकि अन्य वैकल्पिक फसलों की बुआई सुचारू रूप से की जा सके.