IPS रतन लाल डांगी मामला: प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने बिलासपुर उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि निलंबित वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी के खिलाफ दर्ज शिकायत की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है, जिसमें उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है. अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि पुलिस महानिदेशक ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नए जांच अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा है.
इस प्रस्ताव के तहत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा को नया जांच अधिकारी तथा आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी (प्रेजेंटिंग ऑफिसर) बनाने की सिफारिश की गई है. सक्षम स्तर से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही यह नई व्यवस्था आधिकारिक रूप से लागू होगी.
यह पूरा मामला एक पुलिस उप-निरीक्षक की पत्नी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया. याचिकाकर्ता महिला ने अक्टूबर 2025 में आईपीएस रतन लाल डांगी पर शारीरिक, मानसिक और वित्तीय प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी.
आरोपों के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए तत्कालीन आईजी आनंद छाबड़ा और तत्कालीन डीआईजी मिलना कुर्रे की दो सदस्यीय समिति का गठन किया था.
हालांकि, याचिकाकर्ता ने पूर्व में की गई इस प्रारंभिक जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. महिला का आरोप था कि जांच के दौरान उनका पक्ष सही तरीके से नहीं सुना गया.
याचिका में पुरानी जांच टीम पर आपत्ति जताते हुए किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी से पूरी निष्पक्षता के साथ नए सिरे से जांच कराने की मांग की गई थी.
दूसरी ओर, निलंबित आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. डांगी का दावा है कि उन्हें साज़िश के तहत फंसाया जा रहा है और उन्होंने महिला के खिलाफ ब्लैकमेलिंग तथा रंगदारी वसूलने की कोशिश के काउंटर-आरोप लगाए हैं.
सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में पेश की गई यह रिपोर्ट विभागीय जांच प्रक्रिया का एक हिस्सा मात्र है, जिसे अदालत द्वारा अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता. मामले में दोनों पक्षों के दावों और कानूनी तथ्यों की समीक्षा अभी जारी है.
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद अब अगली नजरें सक्षम प्राधिकारी के फैसले और उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं. अदालत अगले हफ्ते इस मामले पर दोबारा सुनवाई कर सकती है, जहां नई जांच टीम के गठन और विभागीय कार्रवाई की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी. आगामी विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही इस चर्चित मामले का अंतिम फैसला तय होगा.