बीमा कंपनी की मनमानी खत्म, उपभोक्ता को मिलेगा 11 लाख रुपये
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज करते हुए भिलाई के एक निवासी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली को सेवा में भारी कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है.
जस्टिस गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने दुर्ग जिला उपभोक्ता आयोग के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कंपनी को वाहन की बीमा राशि (IDV) 10 लाख रुपये, मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 5,000 रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.
इसके साथ ही राज्य आयोग ने कंपनी पर 10,000 रुपये का अतिरिक्त अपील शुल्क भी लगाया है.
यह मामला वर्ष 2016 का है, जब भिलाई निवासी विमल साहू का ट्रक चोरी हो गया था. समय पर एफआईआर दर्ज कराने और बीमा कंपनी को सूचित करने के बावजूद, कंपनी दस्तावेजों की कमी और चाबियों की सत्यता जैसे विभिन्न बहाने बनाकर क्लेम को वर्षों तक लटकाए रही.
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए दस्तावेज या चाबियां फर्जी थीं.
अदालत ने माना कि लंबे समय तक क्लेम को लंबित रखना और बार-बार आपत्तियां उठाना उपभोक्ता का उत्पीड़न है.