सार्वजनिक चौक पर धार्मिक मूर्ति स्थापना नियमों का उल्लंघन नहीं: HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मुंगेली जिले के बलानी चौक पर धार्मिक मूर्ति स्थापित करने के नगर पालिका परिषद के निर्णय को चुनौती देने वाली दुकानदारों की याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक चौक पर मूर्ति की स्थापना किसी सरकारी नियम का उल्लंघन नहीं करती है.
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं का यह दावा कि मूर्ति स्थापना से यातायात बाधित होगा और उनके व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार का हनन होगा, पूरी तरह से काल्पनिक है और इसके समर्थन में कोई तकनीकी रिपोर्ट या साइट प्लान पेश नहीं किया गया है.
न्यायालय ने याचिका की कमियों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब किसी मूल कार्रवाई (जैसे तकनीकी स्वीकृति या निविदा) को चुनौती दिए बिना केवल उसके परिणामी आदेश को चुनौती दी जाती है, तो ऐसी याचिका टिकने योग्य नहीं होती.
यह तीसरी बार था जब दुकानदारों ने अपनी तकनीकी खामियों को सुधारे बिना अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया.
सुनवाई के दौरान नगर पालिका के वकील ने स्पष्ट किया कि मूर्ति की स्थापना सड़क के बीचों-बीच नहीं बल्कि सड़क के किनारे नगर पालिका परिसर क्षेत्र में सौंदर्यीकरण योजना के तहत की जा रही है.
राज्य सरकार और परिषद की दलीलों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया तक सीमित है, न कि प्रशासनिक निर्णयों की योग्यता पर. अंततः, तकनीकी आधारों और ठोस साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने मूर्ति स्थापना के खिलाफ दायर याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया.