भारतीय खोज: क्वांटम ध्वनि से लाभ होगा
नई दिल्ली। डेस्क: भारतीय वैज्ञानिकों ने एक आश्चर्यजनक खोज की है. जिसमें क्वांटम ध्वनि, जिसे पहले क्वांटम सिस्टम के लिए हानिकारक माना जाता था, अब कुछ मामलों में फायदेमंद हो सकती है. रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने पाया कि क्वांटम उलझाव का एक विशेष रूप, जिसे अंतःकणीय उलझाव कहते हैं, ध्वनि के प्रभाव में न केवल टिक सकता है, बल्कि यह ध्वनि से उत्पन्न भी हो सकता है.
इस शोध का केंद्र बिंदु है अंतःकणीय उलझाव, जो एक ही कण के विभिन्न गुणों के बीच होने वाला क्वांटम उलझाव है.
परंपरागत रूप से, क्वांटम ध्वनि को उलझाव का दुश्मन माना जाता था, क्योंकि यह डिकोहेरेंस नामक प्रक्रिया के जरिये कणों के बीच के क्वांटम संबंधों को तोड़ देता था. लेकिन इस नये अध्ययन में पाया गया कि अंतःकणीय उलझाव ध्वनि के सामने न केवल अधिक मजबूत है, बल्कि यह एम्पलीट्यूड डेम्पिंग जैसी विशेष परिस्थितियों में पुनर्जनन और यहां तक कि स्वतः निर्माण भी कर सकता है.
इसका मतलब है कि सही परिस्थितियों में ध्वनि क्वांटम सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे मजबूत बना सकती है.
यह अध्ययन दिखाता है कि कुछ खास परिस्थितियों में, जैसे एम्पलीट्यूड डेम्पिंग ध्वनि, उलझाव नष्ट होने के बजाय पुनर्जनन कर सकता है. यह खोज क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैसे क्वांटम संचार और कंप्यूटिंग, के लिये नये रास्ते खोल सकती है. शोध के प्रमुख लेखक अनिमेष सिन्हा रॉय ने बताया कि यह नया दृष्टिकोण क्वांटम सिस्टम को और मजबूत बनाने में मदद कर सकता है.
प्रोफेसर उर्बसी सिन्हा ने कहा, "यह अध्ययन क्वांटम उलझाव के व्यवहार को समझने में एक बड़ा कदम है. हम इसे और यथार्थवादी प्रणालियों में लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं."
यह शोध फ्रंटियर्स इन क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है और इसे राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का समर्थन प्राप्त है.