भारत के 'कॉकरोचों' (Gen-Z) में दम है
नई दिल्ली । डेस्क: सोशल मीडिया पर निराशा के पलों में लिखी गई महज छह शब्दों की एक पोस्ट आज देश में एक व्यापक युवा आंदोलन का रूप ले चुकी है. एक्स पर 30 वर्षीय राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दीपके की यह पोस्ट "अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?" अब देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का मुख्य नारा बन गई है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के उस बयान के जवाब में आई इस पोस्ट ने, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी, एक व्यंग्यात्मक पहल को जन्म दिया. हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया था, लेकिन तब तक इंटरनेट पर युवाओं का आक्रोश एक बड़े जनांदोलन में बदल चुका था.
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) नाम से एक व्यंग्यात्मक मंच अस्तित्व में आया. इस मंच ने देश के करोड़ों युवाओं को एकजुट करने का काम किया, जो लंबे समय से बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और सरकारी तंत्र की जवाबदेही में कमी से आहत थे.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में एकत्र हुए छात्रों और युवाओं का यह विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ केंद्रित था. मई में हुई इस परीक्षा में लगभग 20 लाख छात्र शामिल हुए थे और पेपर लीक के बाद कई छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
लगातार बढ़ते जन दबाव और ऐतिहासिक छात्र प्रदर्शनों के सामने झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसे प्रदर्शनकारी युवाओं की एक बड़ी जीत और सरकार के लिए एक प्रमुख राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है. दिल्ली के अलावा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित कई अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं.
इस पूरे आंदोलन के केंद्र में महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले अभिजीत दीपके हैं. एक साधारण दलित परिवार में जन्मे दीपके के पिता ने बेहद गरीबी का सामना किया है और उनके दादा एक किसान थे. दीपके की दलित पृष्ठभूमि ने उनकी राजनीतिक सोच को गहराई से प्रभावित किया है.
अमरीका के बोस्टन शहर में जनसंपर्क में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे दीपके जून के शुरुआत में भारत लौटे ताकि वे जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों को सीधे नेतृत्व प्रदान कर सकें. प्रदर्शन स्थल पर जब वे पहुंचे तो उनके हाथ में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की आत्मकथा की प्रति थी.
वर्ष 2020 में आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े दीपके ने मीम्स, हास्य और व्यंग्य के जरिए अपनी विशिष्ट राजनीतिक संचार शैली विकसित की थी. हालांकि अब वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं, फिर भी विपक्षी दलों ने इस छात्र आंदोलन का समर्थन किया है.
यूट्यूबर मेघनाद एस. और उनके साथियों द्वारा एआई टूल्स की मदद से शुरू किए गए इस व्यंग्यात्मक पेज ने देखते ही देखते करोड़ों लोगों को जोड़ लिया और इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई.
अभिजीत दीपके और अन्य आयोजकों को मिल रही धमकियों के बावजूद वे भारत लौटे और आंदोलन को पूरी तरह अहिंसक बनाए रखने की अपील करते रहे. सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के बाद सार्वजनिक जनाक्रोश और बढ़ गया, जिससे इस आंदोलन को और गति मिली.
शनिवार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर खुशी की लहर दौड़ गई. दीपके ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि यह जीत इस बात का प्रमाण है कि यदि जनता निडर होकर अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो, तो सत्ता को भी जवाबदेह बनाया जा सकता है.
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती और पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी.