अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा भारत
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पारस्परिक और संतुलित व्यापार को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति व्यक्त की है. इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से आयात होने वाले कृषि और खाद्य उत्पादों की एक व्यापक श्रेणी पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा. इसमें पशु आहार के लिए लाल ज्वार, सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी), मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे प्रमुख कृषि एवं खाद्य उत्पाद शामिल हैं.
सरकार का मानना है कि इस फैसले से दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, यह अंतरिम समझौता 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई व्यापक अमेरिका–भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) वार्ताओं का महत्वपूर्ण परिणाम है.
दोनों देशों ने यह स्पष्ट किया है कि यह ढांचा अंतिम बीटीए की दिशा में एक ठोस आधार तैयार करेगा, जिससे अतिरिक्त बाजार पहुंच, अधिक पारदर्शी नियम और आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती सुनिश्चित की जा सकेगी.
कृषि क्षेत्र के साथ-साथ समझौते में गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी विशेष जोर दिया गया है. भारत ने अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही नियामक और तकनीकी अड़चनों को दूर करने पर सहमति जताई है. इसके तहत आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने, परीक्षण और मानकों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता लाने तथा अंतरराष्ट्रीय या अमेरिकी मानकों को स्वीकार करने की संभावनाओं पर समयबद्ध निर्णय लेने का प्रावधान किया गया है.
समझौते के अनुसार, दोनों देश यह भी सुनिश्चित करेंगे कि व्यापार समझौते से मिलने वाले लाभ मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को ही प्राप्त हों. इसके लिए मूल देश नियमों (रूल्स ऑफ ओरिजिन) को मजबूत किया जाएगा, ताकि तीसरे देशों के माध्यम से होने वाले अप्रत्यक्ष व्यापार पर अंकुश लगाया जा सके. साथ ही, तकनीकी विनियमों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर आपसी चर्चा के जरिए व्यापार को और अधिक सुगम बनाने का प्रयास किया जाएगा.
सरकार का कहना है कि यह अंतरिम समझौता केवल कृषि व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है. इसके माध्यम से दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, निवेश सहयोग और दीर्घकालिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कमी से जहां अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों को भी अधिक विकल्प और प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिल सकता है.